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बड़ा हवाला रैकेट उजागर
डिजिटल हवाला के जरिए संदिग्ध लेनदेन का खुलासा
जम्मू-कश्मीर में डिजिटल हवाला नेटवर्क ध्वस्त, 8 हजार संदिग्ध बैंक खाते फ्रीज
16 Feb 2026, 12:48 PM
Jammu and Kashmir -
Srinagar
Reporter :
Mahesh Sharma
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Srinagar जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े डिजिटल हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए करीब 8,000 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। जांच में सामने आया है कि ये खाते तथाकथित “म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे, जिनके जरिए अवैध धन का लेनदेन और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग की जा रही थी।
अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क साइबर ठगी और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों से जुड़ा हुआ था। म्यूल अकाउंट वे खाते होते हैं, जिन्हें असली अपराधी अपने नाम से इस्तेमाल करने के बजाय किसी और व्यक्ति के नाम पर खुलवाते या किराए पर लेते हैं। इन खातों के जरिए अवैध रूप से प्राप्त धन को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाता है, जिससे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
जांच एजेंसियों ने पाया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग कर यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा था। कमीशन के लालच में कई लोग अपने बैंक खाते ऐसे गिरोहों को उपलब्ध करा रहे थे। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि भले ही खाताधारक सीधे ठगी में शामिल न हों, लेकिन वे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माने जाएंगे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब खातों से जुड़े लेनदेन, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की विस्तृत जांच कर रही हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि इन फंड्स का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता था।
सुरक्षा एजेंसियों ने बैंकिंग संस्थानों को भी सतर्क रहने और संदिग्ध लेनदेन की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आम नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या ओटीपी किसी को साझा न करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल हवाला का यह नया मॉडल पारंपरिक हवाला से ज्यादा जटिल और खतरनाक है, क्योंकि इसमें ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग होता है और ट्रैकिंग कठिन हो जाती है। ऐसे में समय रहते की गई यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि साइबर अपराध और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर अब सख्त नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क साइबर ठगी और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों से जुड़ा हुआ था। म्यूल अकाउंट वे खाते होते हैं, जिन्हें असली अपराधी अपने नाम से इस्तेमाल करने के बजाय किसी और व्यक्ति के नाम पर खुलवाते या किराए पर लेते हैं। इन खातों के जरिए अवैध रूप से प्राप्त धन को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाता है, जिससे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
जांच एजेंसियों ने पाया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग कर यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा था। कमीशन के लालच में कई लोग अपने बैंक खाते ऐसे गिरोहों को उपलब्ध करा रहे थे। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि भले ही खाताधारक सीधे ठगी में शामिल न हों, लेकिन वे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माने जाएंगे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब खातों से जुड़े लेनदेन, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की विस्तृत जांच कर रही हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि इन फंड्स का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता था।
सुरक्षा एजेंसियों ने बैंकिंग संस्थानों को भी सतर्क रहने और संदिग्ध लेनदेन की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आम नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या ओटीपी किसी को साझा न करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल हवाला का यह नया मॉडल पारंपरिक हवाला से ज्यादा जटिल और खतरनाक है, क्योंकि इसमें ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग होता है और ट्रैकिंग कठिन हो जाती है। ऐसे में समय रहते की गई यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि साइबर अपराध और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर अब सख्त नजर रखी जा रही है।