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एआई प्रगति पर बड़ा बयान
एआई तेजी से मानव बुद्धि को चुनौती दे रहा
कुछ वर्षों में मानव क्षमताओं से आगे बढ़ेगा एआई, समिट में बड़ा दावा
19 Feb 2026, 01:31 PM
Delhi -
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
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New Delhi नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को लेकर बड़ा दावा सामने आया। एआई रिसर्च कंपनी Anthropic के सीईओ Dario Amodei ने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में एआई मानव संज्ञानात्मक क्षमताओं को कई क्षेत्रों में पीछे छोड़ सकता है। उनके इस बयान ने तकनीकी जगत में नई बहस छेड़ दी है।
अमोडेई ने अपने संबोधन में कहा कि एआई की प्रगति इतनी तीव्र गति से हो रही है कि इसे “इंटेलिजेंस के लिए मूर लॉ” कहा जा सकता है। उनका संकेत उस सिद्धांत की ओर था, जिसमें कंप्यूटिंग पावर समय के साथ तेजी से बढ़ती है। उन्होंने कहा कि इसी तरह एआई की क्षमता भी लगातार दोगुनी रफ्तार से विकसित हो रही है, जिससे यह जटिल समस्याओं को हल करने में इंसानों से आगे निकल सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बदलाव अचानक नहीं होगा, बल्कि क्रमिक रूप से कई पेशेवर और तकनीकी क्षेत्रों में दिखाई देगा। हेल्थकेयर, शिक्षा, शासन और कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई पहले से सक्रिय है और निर्णय लेने, डेटा विश्लेषण तथा पूर्वानुमान में अहम भूमिका निभा रहा है।
समिट में अन्य वक्ताओं ने भी एआई के अवसरों और जोखिमों पर चर्चा की। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में कहा कि एआई का उद्देश्य मानव को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उसे अधिक सक्षम बनाना है। उन्होंने जिम्मेदार और नैतिक एआई विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई की क्षमताओं में वृद्धि के साथ-साथ नियमन, डेटा सुरक्षा और नैतिक मानकों पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि एआई मानव बुद्धि से आगे निकलता है, तो इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव गहरे हो सकते हैं। रोजगार के स्वरूप में बदलाव, नई स्किल्स की आवश्यकता और नीति निर्माण में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे।
हालांकि, अमोडेई ने यह भी कहा कि एआई का विकास मानव हित में होना चाहिए। उन्होंने सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही, ताकि तकनीक समाज के लिए लाभकारी सिद्ध हो।
कुल मिलाकर, समिट में हुई चर्चा ने यह संकेत दिया कि एआई केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम बन सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मानव और मशीन के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है।
अमोडेई ने अपने संबोधन में कहा कि एआई की प्रगति इतनी तीव्र गति से हो रही है कि इसे “इंटेलिजेंस के लिए मूर लॉ” कहा जा सकता है। उनका संकेत उस सिद्धांत की ओर था, जिसमें कंप्यूटिंग पावर समय के साथ तेजी से बढ़ती है। उन्होंने कहा कि इसी तरह एआई की क्षमता भी लगातार दोगुनी रफ्तार से विकसित हो रही है, जिससे यह जटिल समस्याओं को हल करने में इंसानों से आगे निकल सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बदलाव अचानक नहीं होगा, बल्कि क्रमिक रूप से कई पेशेवर और तकनीकी क्षेत्रों में दिखाई देगा। हेल्थकेयर, शिक्षा, शासन और कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई पहले से सक्रिय है और निर्णय लेने, डेटा विश्लेषण तथा पूर्वानुमान में अहम भूमिका निभा रहा है।
समिट में अन्य वक्ताओं ने भी एआई के अवसरों और जोखिमों पर चर्चा की। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में कहा कि एआई का उद्देश्य मानव को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उसे अधिक सक्षम बनाना है। उन्होंने जिम्मेदार और नैतिक एआई विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई की क्षमताओं में वृद्धि के साथ-साथ नियमन, डेटा सुरक्षा और नैतिक मानकों पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि एआई मानव बुद्धि से आगे निकलता है, तो इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव गहरे हो सकते हैं। रोजगार के स्वरूप में बदलाव, नई स्किल्स की आवश्यकता और नीति निर्माण में पारदर्शिता जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे।
हालांकि, अमोडेई ने यह भी कहा कि एआई का विकास मानव हित में होना चाहिए। उन्होंने सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही, ताकि तकनीक समाज के लिए लाभकारी सिद्ध हो।
कुल मिलाकर, समिट में हुई चर्चा ने यह संकेत दिया कि एआई केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम बन सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मानव और मशीन के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है।