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दिल्ली गड्ढा हादसा
खुले गड्ढे में मौत, ठेकेदारों पर सख्त एक्शन
जनकपुरी गड्ढा हादसा: दो ठेकेदारों पर गैर-जमानती वारंट, एक की हिरासत बढ़ी
10 Feb 2026, 12:47 PM Delhi - New Delhi
Reporter : Mahesh Sharma
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New Delhi दिल्ली के जनकपुरी इलाके में खुले पड़े सीवर गड्ढे में गिरकर युवक की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर लापरवाही के प्रकरण में दिल्ली पुलिस ने दो ठेकेदारों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है, जबकि एक सब-कॉन्ट्रैक्टर की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी गई है।

यह दर्दनाक हादसा शुक्रवार तड़के हुआ, जब 25 वर्षीय निजी बैंक कर्मचारी कमल ध्यानी बाइक से घर लौट रहे थे। जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवर लाइन के कार्य के लिए करीब 15 फुट गहरा गड्ढा खोदा गया था, जिसे न तो ढका गया था और न ही वहां कोई चेतावनी संकेत लगाए गए थे। अंधेरे के कारण कमल को गड्ढा दिखाई नहीं दिया और वह सीधे उसमें गिर गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए। मामले की जांच में सामने आया कि निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों ने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य ठेकेदार हिमांशु गुप्ता और कविश गुप्ता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। दोनों आपस में भाई हैं और लंबे समय से फरार बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा, सब-कॉन्ट्रैक्टर राकेश प्रजापति को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि घटना की जानकारी होने के बावजूद उसने न तो पुलिस को सूचित किया और न ही किसी आपात सेवा को बुलाया। इसी आधार पर उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धारा लगाई गई है। अदालत ने उसकी न्यायिक हिरासत आगे बढ़ा दी है।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का नतीजा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या रही और क्या उनकी ओर से निगरानी में चूक हुई।

हादसे के बाद इलाके में लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। स्थानीय निवासियों ने खुले गड्ढों और अधूरे कामों को लेकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। लोगों का कहना है कि राजधानी में इस तरह की लापरवाही आम होती जा रही है, जिससे आम नागरिकों की जान खतरे में पड़ रही है।

पुलिस का दावा है कि फरार ठेकेदारों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

यह घटना एक बार फिर शहरी बुनियादी ढांचे में सुरक्षा और जवाबदेही की गंभीर कमी को उजागर करती है।