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लोन गिरोह का भंडाफोड़
मड़ियांव क्षेत्र से आरोपी की गिरफ्तारी
लखनऊ में फर्जी लोन गैंग का खुलासा, सरगना आमिर एहसन STF के हत्थे चढ़ा
16 Feb 2026, 12:12 PM
Uttar Pradesh -
Lucknow
Reporter :
Mahesh Sharma
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Lucknow उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्पेशल टास्क फोर्स ने फर्जी लोन गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके सरगना आमिर एहसन को गिरफ्तार किया है। आरोपी को मड़ियांव इलाके से दबोचा गया। एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह ने सौ से अधिक लोगों, फर्मों और कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की है।
जांच में सामने आया है कि आमिर एहसन ने वर्ष 2017 में एक फर्जी कंपनी बनाकर बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग शुरू किया। गिरोह के सदस्य आधार, पैन और अन्य पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर विभिन्न बैंकों से लोन स्वीकृत कराते थे। इसके बाद फर्जी हस्ताक्षर और तैयार किए गए कोटेशन के जरिए रकम निकाल ली जाती थी।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, गिरोह ने विशेष रूप से Union Bank of India की जानकीपुरम शाखा समेत कई वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाया। एक मामले में गिरोह के सदस्य इंद्रजीत सिंह ने एक व्यक्ति को बैंक ले जाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन प्रक्रिया पूरी कराई। बाद में रकम का बड़ा हिस्सा गिरोह ने हड़प लिया।
प्रारंभिक पूछताछ में आमिर ने स्वीकार किया है कि गिरोह ने 100 से अधिक लोगों और संस्थाओं के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण उठाया। कई मामलों में पीड़ितों को लोन की जानकारी तब हुई जब बैंक की वसूली नोटिस उनके पास पहुंची। इससे कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए।
एसटीएफ का कहना है कि यह एक संगठित रैकेट था, जिसमें दस्तावेज तैयार करने, बैंक प्रक्रिया पूरी कराने और रकम निकालने के लिए अलग-अलग सदस्य जिम्मेदार थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वित्तीय अपराधों से बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। साथ ही आम नागरिकों के व्यक्तिगत दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आधार, पैन और बैंकिंग दस्तावेजों की जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें।
फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है। एसटीएफ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं। मामले की जांच जारी है और आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
जांच में सामने आया है कि आमिर एहसन ने वर्ष 2017 में एक फर्जी कंपनी बनाकर बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग शुरू किया। गिरोह के सदस्य आधार, पैन और अन्य पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर विभिन्न बैंकों से लोन स्वीकृत कराते थे। इसके बाद फर्जी हस्ताक्षर और तैयार किए गए कोटेशन के जरिए रकम निकाल ली जाती थी।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, गिरोह ने विशेष रूप से Union Bank of India की जानकीपुरम शाखा समेत कई वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाया। एक मामले में गिरोह के सदस्य इंद्रजीत सिंह ने एक व्यक्ति को बैंक ले जाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन प्रक्रिया पूरी कराई। बाद में रकम का बड़ा हिस्सा गिरोह ने हड़प लिया।
प्रारंभिक पूछताछ में आमिर ने स्वीकार किया है कि गिरोह ने 100 से अधिक लोगों और संस्थाओं के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण उठाया। कई मामलों में पीड़ितों को लोन की जानकारी तब हुई जब बैंक की वसूली नोटिस उनके पास पहुंची। इससे कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए।
एसटीएफ का कहना है कि यह एक संगठित रैकेट था, जिसमें दस्तावेज तैयार करने, बैंक प्रक्रिया पूरी कराने और रकम निकालने के लिए अलग-अलग सदस्य जिम्मेदार थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वित्तीय अपराधों से बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। साथ ही आम नागरिकों के व्यक्तिगत दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आधार, पैन और बैंकिंग दस्तावेजों की जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें।
फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है। एसटीएफ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं। मामले की जांच जारी है और आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।