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नमक ढुलाई में नई रफ्तार
स्टेनलेस कंटेनर से लोडिंग-अनलोडिंग समय घटा
रेलवे ने स्टेनलेस स्टील कंटेनरों से नमक परिवहन को बनाया तेज और सुरक्षित
11 Feb 2026, 04:42 PM
Gujarat -
Gandhidham
Reporter :
Mahesh Sharma
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Gandhidham भारतीय रेलवे ने औद्योगिक नमक की ढुलाई को तेज, सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। गुजरात के गांधीधाम से किए गए एक सफल ट्रायल में पहली बार स्टेनलेस स्टील कंटेनरों के जरिए नमक परिवहन का परीक्षण किया गया। इस नई व्यवस्था से लोडिंग और अनलोडिंग का समय उल्लेखनीय रूप से घट गया है, जिससे उद्योगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रायल में 33 टन औद्योगिक नमक को 20 फीट लंबे, 8.5 फीट ऊंचे और 8.5 फीट चौड़े स्टेनलेस स्टील कंटेनर में भरा गया। खास बात यह रही कि लोडिंग प्रक्रिया केवल 15 मिनट में पूरी हो गई, जबकि अनलोडिंग में महज 4 मिनट लगे। पारंपरिक तरीकों की तुलना में यह समय काफी कम है।
नमक परिवहन में आमतौर पर जंग और नमी की समस्या सामने आती रही है, जिससे माल की गुणवत्ता प्रभावित होती है और कंटेनरों की उम्र भी घटती है। स्टेनलेस स्टील कंटेनरों के उपयोग से जंग की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी। इससे न केवल रखरखाव लागत घटेगी, बल्कि माल की सुरक्षा भी बेहतर होगी।
रेलवे का मानना है कि यह पहल ग्रीन लॉजिस्टिक्स की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। तेज लोडिंग-अनलोडिंग से ट्रेनों का टर्नअराउंड टाइम कम होगा, जिससे ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उद्योग जगत के लिए यह व्यवस्था “गेम चेंजर” साबित हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़े पैमाने पर नमक उत्पादन और निर्यात होता है।
गुजरात देश में नमक उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और यहां से बड़ी मात्रा में औद्योगिक नमक देश-विदेश भेजा जाता है। ऐसे में तेज और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था से निर्यात क्षमता में भी वृद्धि हो सकती है। पश्चिम रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल सफल रहने के बाद इस मॉडल को अन्य जोनों में भी लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो अन्य थोक वस्तुओं की ढुलाई में भी इसी तरह के कंटेनरों का उपयोग किया जा सकता है। इससे रेलवे की माल ढुलाई क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों बढ़ेंगी।
भारतीय रेलवे लगातार माल परिवहन क्षेत्र में नवाचार कर रहा है। यह नया प्रयोग न केवल संचालन दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि उद्योगों को समय और लागत दोनों में राहत देगा। आने वाले महीनों में इसके व्यापक उपयोग की संभावना जताई जा रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रायल में 33 टन औद्योगिक नमक को 20 फीट लंबे, 8.5 फीट ऊंचे और 8.5 फीट चौड़े स्टेनलेस स्टील कंटेनर में भरा गया। खास बात यह रही कि लोडिंग प्रक्रिया केवल 15 मिनट में पूरी हो गई, जबकि अनलोडिंग में महज 4 मिनट लगे। पारंपरिक तरीकों की तुलना में यह समय काफी कम है।
नमक परिवहन में आमतौर पर जंग और नमी की समस्या सामने आती रही है, जिससे माल की गुणवत्ता प्रभावित होती है और कंटेनरों की उम्र भी घटती है। स्टेनलेस स्टील कंटेनरों के उपयोग से जंग की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी। इससे न केवल रखरखाव लागत घटेगी, बल्कि माल की सुरक्षा भी बेहतर होगी।
रेलवे का मानना है कि यह पहल ग्रीन लॉजिस्टिक्स की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। तेज लोडिंग-अनलोडिंग से ट्रेनों का टर्नअराउंड टाइम कम होगा, जिससे ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उद्योग जगत के लिए यह व्यवस्था “गेम चेंजर” साबित हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़े पैमाने पर नमक उत्पादन और निर्यात होता है।
गुजरात देश में नमक उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और यहां से बड़ी मात्रा में औद्योगिक नमक देश-विदेश भेजा जाता है। ऐसे में तेज और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था से निर्यात क्षमता में भी वृद्धि हो सकती है। पश्चिम रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल सफल रहने के बाद इस मॉडल को अन्य जोनों में भी लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो अन्य थोक वस्तुओं की ढुलाई में भी इसी तरह के कंटेनरों का उपयोग किया जा सकता है। इससे रेलवे की माल ढुलाई क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों बढ़ेंगी।
भारतीय रेलवे लगातार माल परिवहन क्षेत्र में नवाचार कर रहा है। यह नया प्रयोग न केवल संचालन दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि उद्योगों को समय और लागत दोनों में राहत देगा। आने वाले महीनों में इसके व्यापक उपयोग की संभावना जताई जा रही है।