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क्षेत्रीय दलों पर दबाव
अप्रैल में खाली हो रहीं 37 सीटों पर चुनाव
37 राज्यसभा सीटों पर मुकाबला तेज, बीजेपी-कांग्रेस बढ़त में तो क्षेत्रीय दलों पर संकट
19 Feb 2026, 11:56 AM
Maharashtra -
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
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Mumbai देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को मतदान होना है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया फरवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर मार्च के पहले सप्ताह तक चलेगी। अप्रैल में इन सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिसके चलते यह चुनाव सियासी दृष्टि से बेहद अहम माने जा रहे हैं।
इन चुनावों में सबसे ज्यादा सात सीटें महाराष्ट्र से खाली हो रही हैं। इसके अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, हरियाणा और तेलंगाना समेत अन्य राज्यों में भी सीटें दांव पर हैं। मौजूदा समीकरणों को देखें तो सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस भी कुछ राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी अपनी संख्या बढ़ाने की स्थिति में दिख रही है। वहीं, बिहार में एनडीए चार सीटें जीत सकता है, जिससे राष्ट्रीय जनता दल को झटका लग सकता है।
कांग्रेस की स्थिति असम और हरियाणा जैसे राज्यों में बेहतर बताई जा रही है। असम में भाजपा दो सीटें सुरक्षित कर सकती है, जबकि एक सीट पर कांग्रेस गठबंधन को फायदा मिल सकता है। हरियाणा में भी सियासी गणित कांग्रेस के पक्ष में जाता दिख रहा है।
इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों के सामने चुनौती अधिक है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जैसे दलों को संभावित नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर वोटिंग होने के कारण छोटे दलों की रणनीति बेहद अहम हो गई है।
राज्यसभा के ये चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उच्च सदन में संख्या संतुलन सरकार की विधायी रणनीति को प्रभावित करता है। यदि बीजेपी अपनी सीटें 9 से बढ़ाकर 12 तक ले जाती है और कांग्रेस भी अपनी संख्या में इजाफा करती है, तो आने वाले सत्रों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
संसदीय राजनीति में राज्यसभा का महत्व खास है, क्योंकि यहां पारित होने वाले विधेयकों के लिए बहुमत आवश्यक होता है। ऐसे में हर सीट का महत्व बढ़ जाता है।
कुल मिलाकर, 37 सीटों पर होने वाला यह चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले दिनों में नामांकन और प्रत्याशियों के चयन के साथ सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
इन चुनावों में सबसे ज्यादा सात सीटें महाराष्ट्र से खाली हो रही हैं। इसके अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, हरियाणा और तेलंगाना समेत अन्य राज्यों में भी सीटें दांव पर हैं। मौजूदा समीकरणों को देखें तो सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस भी कुछ राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी अपनी संख्या बढ़ाने की स्थिति में दिख रही है। वहीं, बिहार में एनडीए चार सीटें जीत सकता है, जिससे राष्ट्रीय जनता दल को झटका लग सकता है।
कांग्रेस की स्थिति असम और हरियाणा जैसे राज्यों में बेहतर बताई जा रही है। असम में भाजपा दो सीटें सुरक्षित कर सकती है, जबकि एक सीट पर कांग्रेस गठबंधन को फायदा मिल सकता है। हरियाणा में भी सियासी गणित कांग्रेस के पक्ष में जाता दिख रहा है।
इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों के सामने चुनौती अधिक है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जैसे दलों को संभावित नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर वोटिंग होने के कारण छोटे दलों की रणनीति बेहद अहम हो गई है।
राज्यसभा के ये चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उच्च सदन में संख्या संतुलन सरकार की विधायी रणनीति को प्रभावित करता है। यदि बीजेपी अपनी सीटें 9 से बढ़ाकर 12 तक ले जाती है और कांग्रेस भी अपनी संख्या में इजाफा करती है, तो आने वाले सत्रों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
संसदीय राजनीति में राज्यसभा का महत्व खास है, क्योंकि यहां पारित होने वाले विधेयकों के लिए बहुमत आवश्यक होता है। ऐसे में हर सीट का महत्व बढ़ जाता है।
कुल मिलाकर, 37 सीटों पर होने वाला यह चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले दिनों में नामांकन और प्रत्याशियों के चयन के साथ सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।