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सेंसेक्स में भारी गिरावट
सेंसेक्स 1048 अंक गिरकर 82,626 पर बंद
अमेरिकी गिरावट के असर से बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निवेशकों के 7 लाख करोड़ डूबे
13 Feb 2026, 04:28 PM
Maharashtra -
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
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Mumbai वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों में आई तेज गिरावट का असर घरेलू निवेशकों के मनोबल पर साफ दिखाई दिया, जिसके चलते बाजार खुलते ही बिकवाली हावी हो गई। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद अंततः BSE का प्रमुख सूचकांक Sensex 1048 अंक यानी 1.25 फीसदी टूटकर 82,626 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 336 अंक यानी 1.30 फीसदी गिरकर 25,471 के स्तर पर क्लोज हुआ।
इस गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। अनुमान है कि बाजार पूंजीकरण में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, जिससे लाखों निवेशकों के पोर्टफोलियो लाल निशान में बंद हुए। आईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी बाजारों में आई कमजोरी और टेक्नोलॉजी कंपनियों में अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों को लेकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा और निवेश के पुनर्मूल्यांकन की आशंका से आईटी शेयरों में तेज गिरावट देखी गई।
मुंबई स्थित बाजार विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने भी गिरावट को तेज किया। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार पर दबाव बनाया।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई। बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। बाजार के जानकारों का मानना है कि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, क्योंकि वैश्विक संकेत अभी स्थिर नहीं हैं।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर साबित हो सकती है। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की सलाह दी जा रही है।
कुल मिलाकर, शुक्रवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। अब सबकी नजरें आगामी वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर टिकी हैं, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं।
इस गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। अनुमान है कि बाजार पूंजीकरण में करीब 7 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, जिससे लाखों निवेशकों के पोर्टफोलियो लाल निशान में बंद हुए। आईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी बाजारों में आई कमजोरी और टेक्नोलॉजी कंपनियों में अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों को लेकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा और निवेश के पुनर्मूल्यांकन की आशंका से आईटी शेयरों में तेज गिरावट देखी गई।
मुंबई स्थित बाजार विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने भी गिरावट को तेज किया। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार पर दबाव बनाया।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई। बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। बाजार के जानकारों का मानना है कि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, क्योंकि वैश्विक संकेत अभी स्थिर नहीं हैं।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर साबित हो सकती है। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की सलाह दी जा रही है।
कुल मिलाकर, शुक्रवार का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। अब सबकी नजरें आगामी वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर टिकी हैं, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं।