Search News
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
भव्य आयोजन में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
प्रयागराज की पावन धरती पर आयोजित एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम ने पूरे शहर को भक्ति और उत्साह से भर दिया। राष्ट्र हनुमंत कथा से पहले निकाली गई विशाल कलश यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि रामानंद सागर की प्रसिद्ध रामायण के प्रमुख कलाकार एक साथ इस यात्रा में शामिल हुए। जैसे ही रथ पर सवार कलाकारों ने लोगों का अभिवादन किया, वैसे ही सड़कों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई अपने आराध्य के रूप में देखे जाने वाले इन कलाकारों की एक झलक पाने के लिए आतुर नजर आया।
राम-सीता-लक्ष्मण की झलक ने बढ़ाई भावनाएं
टीवी पर वर्षों पहले प्रसारित रामायण में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले कलाकारों की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी जब एक साथ रथ पर नजर आए, तो लोगों की भावनाएं चरम पर पहुंच गईं। कई श्रद्धालु उन्हें वास्तविक भगवान का स्वरूप मानकर उनके सामने नतमस्तक होते दिखाई दिए। इस दृश्य ने एक बार फिर साबित कर दिया कि रामायण का प्रभाव भारतीय समाज में कितना गहरा है और इन कलाकारों की छवि आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।
धीरेंद्र शास्त्री के बुलावे पर हुआ आयोजन
इस भव्य आयोजन का नेतृत्व बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री द्वारा किया गया। उनके आह्वान पर यह कलश यात्रा आयोजित की गई, जो राष्ट्र हनुमंत कथा की शुरुआत से पहले निकाली गई थी। आयोजन स्थल से लेकर पूरे मार्ग तक सुरक्षा और व्यवस्थाओं का खास ध्यान रखा गया था। शास्त्री के अनुयायियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का यह संगम लोगों के लिए एक अनूठा अनुभव बन गया।
ढोल-ताशों और रथ यात्रा से सजा माहौल
कलश यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में ढोल-ताशों की गूंज सुनाई दी, जिससे वातावरण पूरी तरह धार्मिक और उत्सवमय बन गया। मुंबई से आए कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया। रथ पर सवार रामायण के कलाकारों के साथ-साथ भक्तगण जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। यात्रा का मार्ग शहर के प्रमुख इलाकों से होकर गुजरा, जहां लोगों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। हर मोड़ पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही और पूरा शहर एक धार्मिक उत्सव में बदल गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें और वीडियो
इस आयोजन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोगों ने इन पलों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया। कलाकारों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए प्रयागराज की इस यात्रा को बेहद खास बताया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह लोग हाथ जोड़कर उनका अभिवादन कर रहे हैं और आशीर्वाद लेने की कोशिश कर रहे हैं। इस आयोजन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी जबरदस्त चर्चा बटोरी है।
आस्था और मनोरंजन का अनोखा संगम
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसमें मनोरंजन और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। रामायण जैसे ऐतिहासिक धारावाहिक के कलाकारों की मौजूदगी ने इसे और खास बना दिया। इस तरह के आयोजन भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रयागराज में आयोजित यह कार्यक्रम आने वाले समय में भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और यह साबित करेगा कि आस्था की शक्ति आज भी लोगों को एकजुट करने में सक्षम है।
Latest News
Open