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रानी की वाव प्रेम प्रतीक
गुजरात का रानी की वाव उदयमती राजा भीमदेव सोलंकी कला
वैलेंटाइन डे पर रानी की वाव बताती है उदयमती और भीमदेव की प्रेम कहानी
13 Feb 2026, 05:50 PM
Gujarat -
Patan
Reporter :
Mahesh Sharma
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Patan वैलेंटाइन डे के अवसर पर पूरी दुनिया प्रेम को याद करती है, लेकिन गुजरात के पाटन स्थित रानी की वाव एक अनोखी और अमर प्रेम कहानी को दर्शाती है। यह स्मारक किसी सामान्य इमारत से कहीं अधिक है – यह राजा भीमदेव और उनकी रानी उदयमती के बीच के गहरे प्रेम का प्रतीक है।
इतिहासकारों के अनुसार, 11वीं सदी में रानी उदयमती ने अपने दिवंगत पति राजा भीमदेव की याद में इस विशाल वाव का निर्माण करवाया था। यह वाव केवल पानी की आपूर्ति का साधन नहीं, बल्कि सोलंकी वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। वाव की सात मंजिलें और दीवारों पर उकेरी गई हजारों मूर्तियां आज भी अपने समय की जीवंत कहानी कहती हैं।
रानी की वाव में प्रत्येक स्तंभ, मूर्ति और सजावट प्रेम, भक्ति और संस्कृति की कहानी बयां करती है। वास्तुकला की बारीकियां और हर कोने में दिखती कलाकारी यह स्मारक विश्व धरोहर की सूची में शामिल है। स्थानीय धरोहर संरक्षण अधिकारियों के अनुसार, वाव के डिजाइन में जल प्रबंधन और कला का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।
इस स्मारक का महत्व केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी है। रानी की वाव में हर साल हजारों पर्यटक आते हैं, जो प्रेम, समर्पण और कला का अनुभव करना चाहते हैं। विशेषकर वैलेंटाइन डे के अवसर पर यह स्थल प्रेमियों के लिए एक विशेष आकर्षण बन जाता है।
रानी उदयमती की प्रेरणा ने इस वाव को सिर्फ स्थापत्य का नमूना नहीं, बल्कि एक प्रेम कथा का प्रतीक बना दिया। राजा भीमदेव की याद में बनाई गई इस वाव की सुंदरता और विशालता दर्शाती है कि सच्चा प्रेम समय और युगों के बंधनों से परे होता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि रानी की वाव में न केवल स्थापत्य कला की झलक मिलती है, बल्कि यह प्रेम और समर्पण की भावना को भी जीवंत करती है। इतिहासकारों और कला प्रेमियों के लिए यह वाव अध्ययन और दर्शन का केंद्र है।
गुजरात सरकार ने भी वाव के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। यह न केवल राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखता है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
संक्षेप में, रानी की वाव केवल एक वास्तुकला की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उदयमती और भीमदेव के सच्चे प्रेम का प्रतीक है। यह स्मारक यह संदेश देता है कि प्रेम समय और मृत्यु की सीमाओं से परे अमर रहता है। वैलेंटाइन डे पर इस वाव की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों और स्मारकों में भी जीवित रहता है।
इतिहासकारों के अनुसार, 11वीं सदी में रानी उदयमती ने अपने दिवंगत पति राजा भीमदेव की याद में इस विशाल वाव का निर्माण करवाया था। यह वाव केवल पानी की आपूर्ति का साधन नहीं, बल्कि सोलंकी वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। वाव की सात मंजिलें और दीवारों पर उकेरी गई हजारों मूर्तियां आज भी अपने समय की जीवंत कहानी कहती हैं।
रानी की वाव में प्रत्येक स्तंभ, मूर्ति और सजावट प्रेम, भक्ति और संस्कृति की कहानी बयां करती है। वास्तुकला की बारीकियां और हर कोने में दिखती कलाकारी यह स्मारक विश्व धरोहर की सूची में शामिल है। स्थानीय धरोहर संरक्षण अधिकारियों के अनुसार, वाव के डिजाइन में जल प्रबंधन और कला का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।
इस स्मारक का महत्व केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी है। रानी की वाव में हर साल हजारों पर्यटक आते हैं, जो प्रेम, समर्पण और कला का अनुभव करना चाहते हैं। विशेषकर वैलेंटाइन डे के अवसर पर यह स्थल प्रेमियों के लिए एक विशेष आकर्षण बन जाता है।
रानी उदयमती की प्रेरणा ने इस वाव को सिर्फ स्थापत्य का नमूना नहीं, बल्कि एक प्रेम कथा का प्रतीक बना दिया। राजा भीमदेव की याद में बनाई गई इस वाव की सुंदरता और विशालता दर्शाती है कि सच्चा प्रेम समय और युगों के बंधनों से परे होता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि रानी की वाव में न केवल स्थापत्य कला की झलक मिलती है, बल्कि यह प्रेम और समर्पण की भावना को भी जीवंत करती है। इतिहासकारों और कला प्रेमियों के लिए यह वाव अध्ययन और दर्शन का केंद्र है।
गुजरात सरकार ने भी वाव के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। यह न केवल राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखता है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
संक्षेप में, रानी की वाव केवल एक वास्तुकला की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उदयमती और भीमदेव के सच्चे प्रेम का प्रतीक है। यह स्मारक यह संदेश देता है कि प्रेम समय और मृत्यु की सीमाओं से परे अमर रहता है। वैलेंटाइन डे पर इस वाव की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों और स्मारकों में भी जीवित रहता है।