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हरीश राणा को दी अंतिम विदाई
13 साल से बिस्तर पर पड़े हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एम्स में पैसिव इच्छामृत्यु के तहत विदा किया गया
15 Mar 2026, 05:27 PM Uttar Pradesh - Ghaziabad
Reporter : Mahesh Sharma
Ghaziabad

हरीश राणा का जीवन संघर्ष

गाजियाबाद के हरीश राणा 13 साल से गंभीर बीमारी और असहनीय पीड़ा से जूझ रहे थे। सोशल मीडिया पर उनका जीवन संघर्ष भावुक कर रहा है। हरीश राणा चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान हादसे का शिकार हुए थे। हॉस्टल की इमारत से गिरने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी। परिवार और डॉक्टरों ने लंबे समय तक उनकी देखभाल की, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो पाया।

एम्स में शिफ्ट और कानूनी आदेश

हरीश राणा को दिल्ली स्थित एम्स में शिफ्ट किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार डॉक्टरों की विशेष टीम ने पैसिव इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू की। इस प्रक्रिया में जीवनरक्षक इलाज को रोक दिया गया ताकि वह असहनीय पीड़ा से राहत पा सकें। यह आदेश इच्छामृत्यु के कानूनी और चिकित्सकीय दिशा-निर्देशों के तहत दिया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

करीब 22 सेकंड का वायरल वीडियो लोगों की आंखों में आंसू ला रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि हरीश राणा बिस्तर पर लेटे हैं और उनकी देखभाल कर रही महिला उनके माथे पर चंदन का तिलक लगाती है। हरीश के चेहरे पर सालों की पीड़ा झलक रही है, लेकिन साथ ही ऐसा भी लग रहा है कि उन्हें अंतिम शांति का एहसास हो रहा है।

इच्छामृत्यु की कानूनी प्रक्रिया

इच्छामृत्यु उस स्थिति में की जाती है जब व्यक्ति गंभीर और असाध्य बीमारी से पीड़ित होता है। पैसिव इच्छामृत्यु में जीवनरक्षक इलाज को रोक दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले कई मामलों में स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूर्ण रूप से व्यक्ति और परिवार की सहमति से होना चाहिए। हरीश राणा के मामले में परिवार और डॉक्टरी टीम ने पूरी प्रक्रिया को कानूनी और चिकित्सकीय मानकों के अनुसार किया।

पारिवारिक और भावुक क्षण

हरीश राणा के अंतिम पलों में परिवार का भावुक समर्थन नजर आया। क्लिप में महिला उनके माथे पर तिलक लगाती है, जबकि अन्य परिवारजन और डॉक्टर उनकी देखभाल करते हैं। यह पल जीवन के संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक बन गया। वीडियो ने सोशल मीडिया पर भारी प्रतिक्रिया और संवेदनशील चर्चाएं शुरू कर दी हैं।

समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र पर प्रभाव

हरीश राणा का मामला इच्छामृत्यु पर समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र में बहस को बढ़ावा दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है। इस घटना ने समाज को गंभीर बीमारियों और जीवन की गुणवत्ता पर विचार करने के लिए प्रेरित किया। हरीश राणा का संघर्ष और विदाई भावुक और चिंतनशील संदेश देती है।

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