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लखनऊ में लगातार बैठकें
कई अहम नेताओं से लगातार मुलाकातें
यूपी में संघ प्रमुख की सक्रियता से तेज अटकलें, क्या सियासी तालमेल का दौर?
19 Feb 2026, 01:50 PM Uttar Pradesh - Lucknow
Reporter : Mahesh Sharma
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Lucknow उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज है। वजह है Rashtriya Swayamsevak Sangh के प्रमुख Mohan Bhagwat की ताबड़तोड़ बैठकों का सिलसिला। उन्होंने हाल के दिनों में कई प्रमुख नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात की है, जिससे सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

इन बैठकों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सहित संगठन और सरकार के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे। हालांकि इन मुलाकातों का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह सामान्य शिष्टाचार भेंट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में सामाजिक समीकरणों, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय को लेकर उठे सवालों और आरक्षण संबंधी बहसों ने राजनीतिक माहौल को संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में संघ प्रमुख की सक्रियता को कुछ लोग “फीडबैक प्रक्रिया” तो कुछ “डैमेज कंट्रोल” के रूप में देख रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी बड़े चुनाव से पहले संगठन और सरकार के बीच तालमेल की समीक्षा स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। उत्तर प्रदेश देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए यहां का राजनीतिक संतुलन राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डालता है।

संघ और सरकार के रिश्ते लंबे समय से विचारधारात्मक आधार पर जुड़े रहे हैं। लेकिन समय-समय पर बदलते सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप रणनीति तय करना आवश्यक माना जाता है। इसी संदर्भ में इन बैठकों को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर समन्वय बैठकों के रूप में भी देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन जमीनी स्तर से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर सरकार को सुझाव देता है, ताकि नीतियों और फैसलों में आवश्यक सुधार किए जा सकें। यह प्रक्रिया चुनावी रणनीति का भी हिस्सा हो सकती है, जहां विभिन्न वर्गों और समुदायों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जाती है।

हालांकि, सरकार या संगठन की ओर से इन बैठकों को लेकर किसी विशेष एजेंडे की पुष्टि नहीं की गई है। आधिकारिक बयान में इन्हें नियमित संवाद का हिस्सा बताया गया है।

फिलहाल, लखनऊ की सियासत में इन बैठकों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। आने वाले समय में यदि किसी नीति या रणनीतिक बदलाव के संकेत मिलते हैं, तो इन मुलाकातों का महत्व और स्पष्ट हो सकता है। अभी के लिए इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठन और सरकार के बीच तालमेल की परीक्षा एक बार फिर सुर्खियों में है।