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POCSO और रेप केस में राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा: शादीशुदा जोड़े पर POCSO और रेप केस चलाना अब वक्त की बर्बादी, बड़ी राहत मिली
03 Apr 2026, 12:55 PM Uttar Pradesh - Allahabad
Reporter : Mahesh Sharma
Allahabad

हाईकोर्ट ने शादीशुदा जोड़े को राहत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसले में कहा है कि यदि पीड़िता और आरोपी आपसी सहमति से शादी कर सुखी वैवाहिक जीवन जी रहे हैं, तो ऐसे मामलों में आपराधिक केस चलाना समय की बर्बादी हो सकता है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकल बेंच ने इस मामले में याचिका पर आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता ने अपने बयान में किसी प्रकार के अपराध होने से इनकार किया और आरोपी के साथ स्वेच्छा से रहने की बात कही। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केस के मूल में जबरदस्ती या अपराध के तत्व मौजूद नहीं हैं। अदालत ने इस आदेश में कहा कि समाज और कानून का उद्देश्य भी समय और संसाधनों की बचत करना होना चाहिए।


पीड़िता ने सभी आरोपों से इनकार किया

इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब पीड़िता ने पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान में किसी भी तरह के अपराध या जबरदस्ती से इंकार कर दिया। कोर्ट ने यह भी माना कि अपहरण, दुष्कर्म या पॉक्सो एक्ट के बुनियादी तत्व इस केस में मौजूद नहीं हैं। पीड़िता एक सहमति देने वाली पक्षकार थी और दोनों का वैवाहिक संबंध पूर्णतया स्वेच्छा और समझौते पर आधारित था। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का उपयोग केवल समय और संसाधन की बर्बादी बन सकता है, इसलिए केस को खारिज करना उचित है।


कोर्ट का आदेश और याचिका की जानकारी

यह आदेश याचिकाकर्ता आकाश नामक व्यक्ति की याचिका पर आया। याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर और मुकदमे में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दोनों पक्ष शादी कर रहे हैं और सहमति से संबंध बनाए हुए हैं, तो आपराधिक कानून के तहत केस चलाना तर्कसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कानून का उद्देश्य पीड़ितों की सुरक्षा के साथ-साथ समाज में समय और संसाधनों का सही उपयोग भी है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकना जरूरी है।


कानून की व्यावहारिक व्याख्या

अदालत ने अपने आदेश में बताया कि पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म कानून का मूल उद्देश्य बच्चों और जबरदस्ती के शिकार लोगों की सुरक्षा करना है। यदि दोनों पक्ष सहमति से विवाह कर खुशहाल जीवन जी रहे हैं, तो मामले को आगे बढ़ाना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालत का निर्णय सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह आदेश कानूनी मामलों में नई मिसाल बन सकता है।


विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया और समाज पर असर

कानून विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश विवाह और सहमति आधारित मामलों में आपराधिक केस के दायरे को सीमित करेगा। समाज में यह संदेश जाएगा कि यदि दोनों पक्ष खुशहाल वैवाहिक जीवन जी रहे हैं, तो कानून उन्हें असुविधा नहीं पहुँचाएगा। यह निर्णय विशेष रूप से ऐसे मामलों में न्याय की गति बढ़ाने और संसाधनों की बचत करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों ने इसे कानूनी और सामाजिक दृष्टि से स्वागत योग्य कदम बताया।


भविष्य में कानून और समाज पर प्रभाव

हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में विवाह और सहमति से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को सरल और त्वरित बना सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य केवल पीड़िता की सुरक्षा करना है, न कि खुशहाल वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करना। इस आदेश से भविष्य में अदालतों में ऐसे मामलों के निष्पादन में समय की बचत होगी और सामाजिक न्याय का सही पालन सुनिश्चित होगा।

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