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आज लगेगा पहला सूर्यग्रहण
दोपहर बाद शुरू होगा ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज, जानें समय, सूतक और प्रभाव की पूरी जानकारी
17 Feb 2026, 11:13 AM
Uttarakhand -
Haridwar
Reporter :
Mahesh Sharma
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Haridwar साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज खगोलीय घटनाओं की श्रृंखला में विशेष महत्व रखता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, वहीं धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के कारण भी इसे खास माना जाता है। भारतीय समयानुसार यह सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर प्रारंभ होगा। ग्रहण का मध्य चरण कुछ समय बाद आएगा और विशेष ‘रिंग ऑफ फायर’ का दृश्य लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक दिखाई देगा।
खगोलविदों के अनुसार यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है, लेकिन उसका बाहरी किनारा चमकता हुआ दिखाई देता है, जिससे आकाश में अग्नि की अंगूठी जैसा दृश्य बनता है। इसी कारण इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दृश्य नहीं होता, वहां सूतक काल मान्य नहीं होता। इसलिए देश के अधिकांश हिस्सों में सूतक का प्रभाव नहीं माना जाएगा। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या विशेष अनुष्ठान रोकने की आवश्यकता केवल वहीं होती है जहां ग्रहण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा या सूक्ष्म परिवर्तन होते हैं, जिससे भोजन की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, फिर भी आस्था रखने वाले लोग इन नियमों का पालन करते हैं।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सूर्य ग्रहण का प्रभाव वैश्विक स्तर पर शासन, प्रशासन और नीतिगत मामलों पर पड़ सकता है। भारत की कुंडली के संदर्भ में दशम भाव के प्रभावित होने की चर्चा की जा रही है, जो सत्ता और प्रशासन से जुड़ा माना जाता है। हालांकि ये आकलन पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
सूर्य ग्रहण को सुरक्षित तरीके से देखने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार बिना प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष चश्मे के सीधे सूर्य को देखना आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहां के लोगों को इसे प्रत्यक्ष देखने का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं के माध्यम से इसका सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।
वैज्ञानिक समुदाय के लिए यह ग्रहण सूर्य की बाहरी परत और प्रकाशीय प्रभावों के अध्ययन का अवसर प्रदान करता है। वहीं धार्मिक दृष्टि से लोग इस दिन जप, ध्यान और दान-पुण्य जैसे कार्यों को महत्व देते हैं।
इस प्रकार वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण विज्ञान और आस्था—दोनों ही दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, भले ही इसका दृश्य भारत में उपलब्ध न हो।
खगोलविदों के अनुसार यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है, लेकिन उसका बाहरी किनारा चमकता हुआ दिखाई देता है, जिससे आकाश में अग्नि की अंगूठी जैसा दृश्य बनता है। इसी कारण इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दृश्य नहीं होता, वहां सूतक काल मान्य नहीं होता। इसलिए देश के अधिकांश हिस्सों में सूतक का प्रभाव नहीं माना जाएगा। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या विशेष अनुष्ठान रोकने की आवश्यकता केवल वहीं होती है जहां ग्रहण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा या सूक्ष्म परिवर्तन होते हैं, जिससे भोजन की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, फिर भी आस्था रखने वाले लोग इन नियमों का पालन करते हैं।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सूर्य ग्रहण का प्रभाव वैश्विक स्तर पर शासन, प्रशासन और नीतिगत मामलों पर पड़ सकता है। भारत की कुंडली के संदर्भ में दशम भाव के प्रभावित होने की चर्चा की जा रही है, जो सत्ता और प्रशासन से जुड़ा माना जाता है। हालांकि ये आकलन पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
सूर्य ग्रहण को सुरक्षित तरीके से देखने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार बिना प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष चश्मे के सीधे सूर्य को देखना आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहां के लोगों को इसे प्रत्यक्ष देखने का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय वेधशालाओं के माध्यम से इसका सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।
वैज्ञानिक समुदाय के लिए यह ग्रहण सूर्य की बाहरी परत और प्रकाशीय प्रभावों के अध्ययन का अवसर प्रदान करता है। वहीं धार्मिक दृष्टि से लोग इस दिन जप, ध्यान और दान-पुण्य जैसे कार्यों को महत्व देते हैं।
इस प्रकार वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण विज्ञान और आस्था—दोनों ही दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, भले ही इसका दृश्य भारत में उपलब्ध न हो।