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रमजान में रंगाई की मांग
रमजान शुरू होते ही मस्जिद की रंगाई-पुताई का मुद्दा गरमाया
रमजान में एएसआई संरक्षित जामा मस्जिद की रंगाई को लेकर फिर उठी अनुमति मांग
19 Feb 2026, 12:33 PM
Uttar Pradesh -
Sambhal
Reporter :
Mahesh Sharma
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Sambhal रमजान का पवित्र महीना आरंभ होते ही संभल स्थित एएसआई संरक्षित जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मस्जिद प्रबंधन समिति ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के मेरठ सर्कल को पत्र भेजकर पारंपरिक रूप से होने वाली सफाई और रंगाई की अनुमति मांगी है। कमेटी का कहना है कि हर वर्ष रमजान से पहले मस्जिद परिसर की साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत का कार्य किया जाता रहा है, जिससे नमाजियों को सुविधा मिल सके।
जामा मस्जिद एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए किसी भी प्रकार का निर्माण, मरम्मत या रंगाई कार्य विभाग की पूर्व अनुमति के बिना संभव नहीं है। बीते वर्ष भी मस्जिद कमेटी ने रंगाई-पुताई की अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन जिला प्रशासन ने सुरक्षा और विधि-व्यवस्था का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
दरअसल, वर्ष 2024 में मस्जिद परिसर को लेकर एक ऐतिहासिक दावा अदालत में दायर किया गया था, जिसमें यह कहा गया कि मस्जिद स्थल पर पूर्व में हरिहर मंदिर था। इस दावे के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी और नवंबर 2024 में हिंसक घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद प्रशासन ने पूरे इलाके को संवेदनशील घोषित कर सख्त निगरानी शुरू कर दी थी।
इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2025 में मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और रंगाई-पुताई की अनुमति देने की मांग की। एएसआई ने अपने पक्ष में कहा था कि संरक्षित स्मारकों पर किसी भी प्रकार का परिवर्तन नियमानुसार और तकनीकी परीक्षण के बाद ही किया जा सकता है। विभाग का तर्क है कि स्मारक की मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पारंपरिक सफाई और हल्की रंगाई तक सीमित है, जिससे रमजान के दौरान आने वाले नमाजियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समिति किसी प्रकार का स्थायी निर्माण कार्य नहीं करना चाहती।
वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों से भी रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि कोई भी निर्णय कानून-व्यवस्था को प्रभावित न करे।
रमजान के मद्देनजर यह मुद्दा धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक संरक्षण और प्रशासनिक नियमों के बीच संतुलन का उदाहरण बन गया है। अब निगाहें एएसआई और स्थानीय प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि मस्जिद में रंगाई-पुताई की अनुमति मिलती है या नहीं।
जामा मस्जिद एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है, इसलिए किसी भी प्रकार का निर्माण, मरम्मत या रंगाई कार्य विभाग की पूर्व अनुमति के बिना संभव नहीं है। बीते वर्ष भी मस्जिद कमेटी ने रंगाई-पुताई की अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन जिला प्रशासन ने सुरक्षा और विधि-व्यवस्था का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
दरअसल, वर्ष 2024 में मस्जिद परिसर को लेकर एक ऐतिहासिक दावा अदालत में दायर किया गया था, जिसमें यह कहा गया कि मस्जिद स्थल पर पूर्व में हरिहर मंदिर था। इस दावे के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी और नवंबर 2024 में हिंसक घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद प्रशासन ने पूरे इलाके को संवेदनशील घोषित कर सख्त निगरानी शुरू कर दी थी।
इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2025 में मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और रंगाई-पुताई की अनुमति देने की मांग की। एएसआई ने अपने पक्ष में कहा था कि संरक्षित स्मारकों पर किसी भी प्रकार का परिवर्तन नियमानुसार और तकनीकी परीक्षण के बाद ही किया जा सकता है। विभाग का तर्क है कि स्मारक की मूल संरचना और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पारंपरिक सफाई और हल्की रंगाई तक सीमित है, जिससे रमजान के दौरान आने वाले नमाजियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समिति किसी प्रकार का स्थायी निर्माण कार्य नहीं करना चाहती।
वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों से भी रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि कोई भी निर्णय कानून-व्यवस्था को प्रभावित न करे।
रमजान के मद्देनजर यह मुद्दा धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक संरक्षण और प्रशासनिक नियमों के बीच संतुलन का उदाहरण बन गया है। अब निगाहें एएसआई और स्थानीय प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि मस्जिद में रंगाई-पुताई की अनुमति मिलती है या नहीं।