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ऐतिहासिक जीत दर्ज
67 वर्षों बाद रणजी फाइनल में पहुंची टीम
67 साल बाद इतिहास रचा, जम्मू-कश्मीर पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में पहुंचा
18 Feb 2026, 12:16 PM
Jammu and Kashmir -
Jammu
Reporter :
Mahesh Sharma
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Jammu भारतीय घरेलू क्रिकेट में बड़ा उलटफेर करते हुए जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है। 67 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंच गई। सेमीफाइनल मुकाबले में उसने बंगाल क्रिकेट टीम को छह विकेट से हराकर यह उपलब्धि हासिल की।
1959-60 सत्र में पहली बार रणजी ट्रॉफी खेलने वाली जम्मू-कश्मीर की टीम ने इस जीत के साथ नया अध्याय लिख दिया। मैच का असली मोड़ तेज गेंदबाज आकिब नबी की घातक गेंदबाजी रही। उन्होंने दोनों पारियों में कुल नौ विकेट झटके और बंगाल की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। खासतौर पर दूसरी पारी में बंगाल की टीम महज 99 रन पर सिमट गई, जिससे मुकाबला पूरी तरह जम्मू-कश्मीर के पक्ष में झुक गया।
पहली पारी में जम्मू-कश्मीर ने 302 रन बनाकर मुकाबले को संतुलन में रखा था। इसके जवाब में बंगाल ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सका। दूसरी पारी में नबी की सटीक लाइन-लेंथ और तेज रफ्तार के सामने बंगाल के बल्लेबाज टिक नहीं पाए। परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर को जीत के लिए केवल 126 रनों का लक्ष्य मिला।
तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक जम्मू-कश्मीर का स्कोर 43/2 था, जिससे मैच में थोड़ा रोमांच बना हुआ था। चौथे दिन सुबह शुभम पुंडीर और कप्तान परस डोगरा जल्दी आउट हो गए, लेकिन इसके बाद वंशज शर्मा ने धैर्यपूर्ण पारी खेली। उन्होंने 43 रन बनाकर पारी को संभाला और टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। दूसरी ओर अब्दुल समद ने आक्रामक अंदाज में 30 रन बनाते हुए मैच को तेजी से खत्म किया।
जम्मू-कश्मीर ने 34.4 ओवर में 126/4 बनाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ड्रेसिंग रूम में जश्न का माहौल देखने लायक था। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की आंखों में खुशी के आंसू थे, क्योंकि यह सफलता दशकों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है।
इस जीत ने न केवल टीम बल्कि पूरे प्रदेश में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि क्षेत्र में क्रिकेट के विकास को नई दिशा देगी। युवा खिलाड़ियों के लिए यह प्रेरणा का स्रोत बनेगी कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
अब सबकी नजरें फाइनल मुकाबले पर हैं, जहां जम्मू-कश्मीर इतिहास को और सुनहरा बनाने के इरादे से उतरेगा।
1959-60 सत्र में पहली बार रणजी ट्रॉफी खेलने वाली जम्मू-कश्मीर की टीम ने इस जीत के साथ नया अध्याय लिख दिया। मैच का असली मोड़ तेज गेंदबाज आकिब नबी की घातक गेंदबाजी रही। उन्होंने दोनों पारियों में कुल नौ विकेट झटके और बंगाल की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। खासतौर पर दूसरी पारी में बंगाल की टीम महज 99 रन पर सिमट गई, जिससे मुकाबला पूरी तरह जम्मू-कश्मीर के पक्ष में झुक गया।
पहली पारी में जम्मू-कश्मीर ने 302 रन बनाकर मुकाबले को संतुलन में रखा था। इसके जवाब में बंगाल ने संघर्ष जरूर किया, लेकिन निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सका। दूसरी पारी में नबी की सटीक लाइन-लेंथ और तेज रफ्तार के सामने बंगाल के बल्लेबाज टिक नहीं पाए। परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर को जीत के लिए केवल 126 रनों का लक्ष्य मिला।
तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक जम्मू-कश्मीर का स्कोर 43/2 था, जिससे मैच में थोड़ा रोमांच बना हुआ था। चौथे दिन सुबह शुभम पुंडीर और कप्तान परस डोगरा जल्दी आउट हो गए, लेकिन इसके बाद वंशज शर्मा ने धैर्यपूर्ण पारी खेली। उन्होंने 43 रन बनाकर पारी को संभाला और टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। दूसरी ओर अब्दुल समद ने आक्रामक अंदाज में 30 रन बनाते हुए मैच को तेजी से खत्म किया।
जम्मू-कश्मीर ने 34.4 ओवर में 126/4 बनाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ड्रेसिंग रूम में जश्न का माहौल देखने लायक था। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की आंखों में खुशी के आंसू थे, क्योंकि यह सफलता दशकों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है।
इस जीत ने न केवल टीम बल्कि पूरे प्रदेश में उत्साह की लहर दौड़ा दी है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि क्षेत्र में क्रिकेट के विकास को नई दिशा देगी। युवा खिलाड़ियों के लिए यह प्रेरणा का स्रोत बनेगी कि सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
अब सबकी नजरें फाइनल मुकाबले पर हैं, जहां जम्मू-कश्मीर इतिहास को और सुनहरा बनाने के इरादे से उतरेगा।