Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- स्वास्थ्य
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
Current:
India
Country: India
Selected State: None
इजरायल की सख्त चेतावनी
फरवरी के तीसरे हफ्ते हालात बेहद संवेदनशील बने
ईरान पर हमले की आहट तेज, होर्मुज में शक्ति प्रदर्शन से बढ़ा तनाव
19 Feb 2026, 10:31 AM
Tehran -
Tehran
Reporter :
Mahesh Sharma
ADVERTISEMENT
Sponsored
Ad
Open
Tehran फरवरी 2026 का तीसरा सप्ताह ईरान के लिए अत्यंत निर्णायक साबित हो रहा है। एक ओर बंद कमरों में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने संभावित सैन्य विकल्पों की जानकारी दी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति के लिए तैयार रखी गई है। हालांकि आधिकारिक तौर पर हमले की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संकेतों ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने अमेरिका की मांगों को सख्ती से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त नहीं करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां सैन्य शक्ति का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बयान दिया कि अमेरिका के साथ बातचीत में “सकारात्मक प्रगति” हुई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यूरेनियम संवर्धन पर अस्थायी सीमाएं लगाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बड़ी बाधा बनी हुई है।
सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी सामने आया है कि 2025 में हुए हमलों से क्षतिग्रस्त सुरंगों और मिसाइल ठिकानों की मरम्मत की जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है।
दूसरी ओर, Benjamin Netanyahu ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग दोहराई है। इजरायल लंबे समय से ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है।
व्हाइट हाउस ने ईरान से समझौते की अपील की है, लेकिन कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तैयारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं दिख रहा। वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे आर्थिक प्रभाव भी पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान की स्थिति बहुआयामी दबावों के बीच फंसी है—एक तरफ वार्ता की उम्मीद, दूसरी ओर युद्ध की आशंका। आने वाले दिन तय करेंगे कि क्षेत्र कूटनीति की राह पर आगे बढ़ेगा या टकराव की दिशा में।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने संभावित सैन्य विकल्पों की जानकारी दी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति के लिए तैयार रखी गई है। हालांकि आधिकारिक तौर पर हमले की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संकेतों ने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने अमेरिका की मांगों को सख्ती से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त नहीं करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां सैन्य शक्ति का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बयान दिया कि अमेरिका के साथ बातचीत में “सकारात्मक प्रगति” हुई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यूरेनियम संवर्धन पर अस्थायी सीमाएं लगाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी बड़ी बाधा बनी हुई है।
सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी सामने आया है कि 2025 में हुए हमलों से क्षतिग्रस्त सुरंगों और मिसाइल ठिकानों की मरम्मत की जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है।
दूसरी ओर, Benjamin Netanyahu ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग दोहराई है। इजरायल लंबे समय से ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है।
व्हाइट हाउस ने ईरान से समझौते की अपील की है, लेकिन कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तैयारियों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं दिख रहा। वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे आर्थिक प्रभाव भी पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान की स्थिति बहुआयामी दबावों के बीच फंसी है—एक तरफ वार्ता की उम्मीद, दूसरी ओर युद्ध की आशंका। आने वाले दिन तय करेंगे कि क्षेत्र कूटनीति की राह पर आगे बढ़ेगा या टकराव की दिशा में।