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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर FIR
पुलिस ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया।
ऑनलाइन ऑर्डर से पहुंचा हथियार, दिल्ली में दो हत्याओं के बाद Blinkit पर केस
18 Feb 2026, 01:01 PM
Delhi -
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
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New Delhi राष्ट्रीय राजधानी में ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं की निगरानी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पश्चिमी दिल्ली के ख्याला इलाके में हुई दो अलग-अलग हत्याओं की जांच के दौरान पुलिस को चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोप है कि वारदात में इस्तेमाल किया गया धारदार हथियार ऑनलाइन ग्रोसरी प्लेटफॉर्म Blinkit के जरिए ऑर्डर किया गया था। इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों मामलों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पता चला कि उन्होंने घटना से पहले मोबाइल ऐप के माध्यम से चाकू जैसे धारदार औजार मंगवाए थे। डिलीवरी कुछ ही समय में उनके पते पर पहुंच गई। इसके बाद उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल कथित तौर पर हत्या में किया गया। इस जानकारी के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने ऑनलाइन लेनदेन, ऑर्डर हिस्ट्री और डिलीवरी रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यदि किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऐसे उत्पादों की बिक्री की जा रही है, जिनका दुरुपयोग संभव है, तो उसके लिए सख्त निगरानी और वेरिफिकेशन प्रक्रिया आवश्यक है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या प्लेटफॉर्म की ओर से उत्पादों की श्रेणीकरण और बिक्री में किसी तरह की लापरवाही बरती गई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी केवल उत्पाद डिलीवरी तक सीमित नहीं हो सकती। यदि प्रतिबंधित या संवेदनशील वस्तुएं बिना पर्याप्त जांच के उपलब्ध कराई जा रही हैं, तो यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि धारदार हथियार या संभावित खतरनाक उपकरणों की बिक्री पर आयु सत्यापन, पहचान प्रमाण और उद्देश्य की स्पष्टता जैसे अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाने चाहिए।
इस घटना के बाद ऑनलाइन क्विक-कॉमर्स कंपनियों के संचालन और नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है। तेजी से डिलीवरी की प्रतिस्पर्धा में सुरक्षा मानकों से समझौता तो नहीं हो रहा, यह भी जांच का विषय बन गया है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वह जांच में सहयोग कर रही है।
ख्याला इलाके में हुई इन दो हत्याओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल सुविधा के इस दौर में सुरक्षा और जवाबदेही का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कंपनी की भूमिका कितनी और किस स्तर तक बनती है। फिलहाल मामले ने राजधानी में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों मामलों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पता चला कि उन्होंने घटना से पहले मोबाइल ऐप के माध्यम से चाकू जैसे धारदार औजार मंगवाए थे। डिलीवरी कुछ ही समय में उनके पते पर पहुंच गई। इसके बाद उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल कथित तौर पर हत्या में किया गया। इस जानकारी के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने ऑनलाइन लेनदेन, ऑर्डर हिस्ट्री और डिलीवरी रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यदि किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऐसे उत्पादों की बिक्री की जा रही है, जिनका दुरुपयोग संभव है, तो उसके लिए सख्त निगरानी और वेरिफिकेशन प्रक्रिया आवश्यक है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या प्लेटफॉर्म की ओर से उत्पादों की श्रेणीकरण और बिक्री में किसी तरह की लापरवाही बरती गई।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी केवल उत्पाद डिलीवरी तक सीमित नहीं हो सकती। यदि प्रतिबंधित या संवेदनशील वस्तुएं बिना पर्याप्त जांच के उपलब्ध कराई जा रही हैं, तो यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि धारदार हथियार या संभावित खतरनाक उपकरणों की बिक्री पर आयु सत्यापन, पहचान प्रमाण और उद्देश्य की स्पष्टता जैसे अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाने चाहिए।
इस घटना के बाद ऑनलाइन क्विक-कॉमर्स कंपनियों के संचालन और नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है। तेजी से डिलीवरी की प्रतिस्पर्धा में सुरक्षा मानकों से समझौता तो नहीं हो रहा, यह भी जांच का विषय बन गया है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वह जांच में सहयोग कर रही है।
ख्याला इलाके में हुई इन दो हत्याओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि डिजिटल सुविधा के इस दौर में सुरक्षा और जवाबदेही का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कंपनी की भूमिका कितनी और किस स्तर तक बनती है। फिलहाल मामले ने राजधानी में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।