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अमेरिका ने दिया लाइसेंस
RIL अब सीधे वेनेजुएला तेल खरीद सकता है
RIL को अमेरिका से वेनेजुएला तेल लाइसेंस मिला; कंपनी सस्ते क्रूड की खरीद करेगी
13 Feb 2026, 03:43 PM
Gujarat -
Jamnagar
Reporter :
Mahesh Sharma
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Jamnagar मुकेश अंबानी की Reliance Industries को संयुक्त राज्य अमेरिका से एक खास लाइसेंस मिल गया है जिससे कंपनी अब Venezuela से कच्चा तेल सीधे खरीद सकती है, बिना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किए। यह लाइसेंस अमेरिका द्वारा जारी किए गए सामान्य लाइसेंस का हिस्सा है, जो पहले से निकाले गए वेनेजुएला स्रोत वाले तेल की खरीद, निर्यात और रिफाइनिंग की अनुमति देता है।
इस कदम का सीधा प्रभाव यह होगा कि रिलायंस अब वेनेजुएला से तेल खरीदकर अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस कर सकती है, जिसमें जामनगर के बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स की क्षमता भी शामिल है। वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल अन्य प्रकार के क्रूड की तुलना में आमतौर पर सस्ता बिकता है, जिससे रिलायंस के रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार हो सकता है।
रिलायंस ने जनवरी में इस लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और इससे पहले भी कंपनी ने वेनेजुएला से लगभग 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा था, जिसे अप्रैल में डिलीवरी के लिए लिया गया। यह खरीदारी संकेत देती है कि कंपनी पहले से ही बाजार में सक्रिय है और यह सौदा अमेरिका की नई ऊर्जा नीति के तहत संभव हुआ है।
इस लाइसेंस से यह भी संभव हो गया है कि रिलायंस अपनी कच्चा तेल सोर्सिंग में रूसी तेल की तुलना में अधिक विविधता ला सके। पिछले कुछ समय से भारतीय रिफाइनर रूस से तेल की खरीद में कमी कर रहे हैं, जिससे वेनेजुएला जैसे अन्य स्रोतों की ओर रुख बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ रिलायंस के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी बल देगा। वेनेजुएला के तेल पर आधारित आपूर्ति से भारत को तेल आयात में लागत कम करने का अवसर मिलेगा, जबकि इसके जरिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और व्यापारिक सहयोग के नए अवसर भी बन सकते हैं।
अमेरिका ने इस कदम को वेनेजुएला के ऊर्जा उद्योग में निवेश और निर्यात को पुनर्जीवित करने की एक औपचारिक नीति के हिस्से के रूप में पेश किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता और आपूर्ति बढ़ सके।
कुल मिलाकर, इस लाइसेंस से रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपने रिफाइनिंग व्यवसाय के विस्तार और तेल स्रोत विविधिकरण के लिए एक बड़ा अवसर मिला है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वेनेजुएला से तेल आयात भारत की ऊर्जा रणनीति और रिलायंस के कारोबारी मॉडल पर किस तरह के असर डालता है।
इस कदम का सीधा प्रभाव यह होगा कि रिलायंस अब वेनेजुएला से तेल खरीदकर अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस कर सकती है, जिसमें जामनगर के बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स की क्षमता भी शामिल है। वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल अन्य प्रकार के क्रूड की तुलना में आमतौर पर सस्ता बिकता है, जिससे रिलायंस के रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार हो सकता है।
रिलायंस ने जनवरी में इस लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और इससे पहले भी कंपनी ने वेनेजुएला से लगभग 2 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा था, जिसे अप्रैल में डिलीवरी के लिए लिया गया। यह खरीदारी संकेत देती है कि कंपनी पहले से ही बाजार में सक्रिय है और यह सौदा अमेरिका की नई ऊर्जा नीति के तहत संभव हुआ है।
इस लाइसेंस से यह भी संभव हो गया है कि रिलायंस अपनी कच्चा तेल सोर्सिंग में रूसी तेल की तुलना में अधिक विविधता ला सके। पिछले कुछ समय से भारतीय रिफाइनर रूस से तेल की खरीद में कमी कर रहे हैं, जिससे वेनेजुएला जैसे अन्य स्रोतों की ओर रुख बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ रिलायंस के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी बल देगा। वेनेजुएला के तेल पर आधारित आपूर्ति से भारत को तेल आयात में लागत कम करने का अवसर मिलेगा, जबकि इसके जरिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और व्यापारिक सहयोग के नए अवसर भी बन सकते हैं।
अमेरिका ने इस कदम को वेनेजुएला के ऊर्जा उद्योग में निवेश और निर्यात को पुनर्जीवित करने की एक औपचारिक नीति के हिस्से के रूप में पेश किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता और आपूर्ति बढ़ सके।
कुल मिलाकर, इस लाइसेंस से रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपने रिफाइनिंग व्यवसाय के विस्तार और तेल स्रोत विविधिकरण के लिए एक बड़ा अवसर मिला है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वेनेजुएला से तेल आयात भारत की ऊर्जा रणनीति और रिलायंस के कारोबारी मॉडल पर किस तरह के असर डालता है।