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मासूमों से लापरवाही
पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाया गया
एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला, हाईकोर्ट के आदेश पर दोषियों पर FIR दर्ज
07 Feb 2026, 01:17 PM
Jharkhand -
Chaibasa
Reporter :
Mahesh Sharma
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Chaibasa झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले से सामने आए एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच मासूम बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
यह घटना अक्टूबर 2025 की बताई जा रही है, जब 5 से 7 वर्ष की आयु के पांच बच्चों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता थी। इलाज के दौरान अस्पताल के ब्लड बैंक से उपलब्ध कराए गए रक्त का उपयोग किया गया, लेकिन बाद में यह सामने आया कि वह रक्त एचआईवी संक्रमित था। कुछ समय बाद बच्चों की मेडिकल जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई, जिससे परिवारों में हड़कंप मच गया।
मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और परिजनों ने इसे घोर चिकित्सकीय लापरवाही बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद मामला झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
सदर थाना प्रभारी तरुण कुमार के अनुसार, एफआईआर में ब्लड बैंक प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों पर रक्त जांच एवं स्क्रीनिंग के निर्धारित मानकों का पालन न करने का आरोप लगाया गया है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि रक्त की आवश्यक जांच किए बिना ही उसे बच्चों को चढ़ा दिया गया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही न केवल मेडिकल एथिक्स का उल्लंघन है, बल्कि मासूम बच्चों के जीवन से खिलवाड़ भी है। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि पूरे ब्लड बैंक सिस्टम की समीक्षा की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त व्यवस्था बनाई जाए।
पीड़ित बच्चों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल और प्रशासन की लापरवाही ने उनके बच्चों का भविष्य अंधेरे में डाल दिया है। उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने और बच्चों के इलाज व पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाए जाने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और ब्लड बैंक से जुड़े सभी दस्तावेज, रिपोर्ट और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। यह मामला राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत माना जा रहा है।
यह घटना अक्टूबर 2025 की बताई जा रही है, जब 5 से 7 वर्ष की आयु के पांच बच्चों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता थी। इलाज के दौरान अस्पताल के ब्लड बैंक से उपलब्ध कराए गए रक्त का उपयोग किया गया, लेकिन बाद में यह सामने आया कि वह रक्त एचआईवी संक्रमित था। कुछ समय बाद बच्चों की मेडिकल जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई, जिससे परिवारों में हड़कंप मच गया।
मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और परिजनों ने इसे घोर चिकित्सकीय लापरवाही बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद मामला झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।
सदर थाना प्रभारी तरुण कुमार के अनुसार, एफआईआर में ब्लड बैंक प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों पर रक्त जांच एवं स्क्रीनिंग के निर्धारित मानकों का पालन न करने का आरोप लगाया गया है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि रक्त की आवश्यक जांच किए बिना ही उसे बच्चों को चढ़ा दिया गया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही न केवल मेडिकल एथिक्स का उल्लंघन है, बल्कि मासूम बच्चों के जीवन से खिलवाड़ भी है। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि पूरे ब्लड बैंक सिस्टम की समीक्षा की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त व्यवस्था बनाई जाए।
पीड़ित बच्चों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल और प्रशासन की लापरवाही ने उनके बच्चों का भविष्य अंधेरे में डाल दिया है। उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने और बच्चों के इलाज व पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाए जाने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और ब्लड बैंक से जुड़े सभी दस्तावेज, रिपोर्ट और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। यह मामला राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत माना जा रहा है।