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बढ़ते बिलों ने लोगों की चिंता बढ़ाई
भदोही जिले में स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं और अब यह मुद्दा आम चर्चा का विषय बन चुका है। जिन उपभोक्ताओं के घरों में पहले सामान्य मीटर लगे हुए थे, वे अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले जहां बिजली का बिल सीमित और समझ में आने वाला होता था, वहीं अब वही खपत होने के बावजूद बिल लगभग दोगुना आ रहा है। इससे आम परिवारों का मासिक बजट बिगड़ रहा है और आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
ऑटोमैटिक शटडाउन से अंधेरे में घर
स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी समस्या इसका ऑटोमैटिक शटडाउन फीचर बन गया है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घरों की बिजली अचानक कट जाती है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज में भारी बाधा आती है। खासकर गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जब बिजली कटने से बच्चों और बुजुर्गों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ परिवारों ने बताया कि उनके घरों में कई दिनों तक बिजली नहीं आई, जिससे उनका जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।
ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं में बढ़ा असंतोष
यह समस्या केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी स्मार्ट मीटर को लेकर भारी असंतोष देखा जा रहा है। गांवों में रहने वाले लोग तकनीकी जानकारी के अभाव में इस सिस्टम को समझ नहीं पा रहे हैं और उन्हें बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि मीटर की रीडिंग सही तरीके से नहीं हो रही, जिससे बिल में गड़बड़ी हो रही है। इस स्थिति ने लोगों के बीच अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।
पुराने मीटर की वापसी की मांग तेज
भदोही के कई इलाकों में अब लोग खुले तौर पर पुराने मीटर की वापसी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर ने उनकी जिंदगी को आसान बनाने के बजाय और मुश्किल बना दिया है। कई उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग के कार्यालयों में शिकायत दर्ज कराई है और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है। लोगों का मानना है कि जब तक सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद नहीं बनता, तब तक इसे लागू करना जल्दबाजी होगी।
सरकार ने नए इंस्टॉलेशन पर लगाई रोक
लगातार बढ़ती शिकायतों को देखते हुए राज्य सरकार ने फिलहाल नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। यह कदम उपभोक्ताओं के दबाव और बढ़ते विरोध के बाद उठाया गया है। हालांकि, जिन घरों में पहले से स्मार्ट मीटर लगे हुए हैं, उनकी समस्याओं का समाधान अभी भी स्पष्ट नहीं है। प्रशासन का कहना है कि तकनीकी खामियों को जल्द दूर किया जाएगा और उपभोक्ताओं को राहत दी जाएगी।
सिस्टम सुधार के बिना भरोसा मुश्किल
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर जैसी आधुनिक तकनीक का उद्देश्य बिजली व्यवस्था को पारदर्शी और कुशल बनाना है, लेकिन अगर इसे सही तरीके से लागू नहीं किया गया तो यह लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। भदोही का मामला इसी बात का उदाहरण बन गया है। जब तक सिस्टम में पारदर्शिता, सही बिलिंग और उपभोक्ता सहायता सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक लोगों का भरोसा जीतना मुश्किल होगा। फिलहाल, उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी मांग यही है कि उन्हें राहत मिले और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए।
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