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वेस्ट बैंक कार्रवाई की आलोचना
वेस्ट बैंक में इजरायल की कार्रवाई पर सवाल
वेस्ट बैंक मुद्दे पर 85 देशों के बयान में भारत की एंट्री से बदले कूटनीतिक संकेत
19 Feb 2026, 01:42 PM
Delhi -
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
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Open
New Delhi वेस्ट बैंक में इजरायल की कथित एकतरफा कार्रवाइयों के खिलाफ जारी 85 देशों के संयुक्त बयान में भारत के शामिल होने से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। शुरुआत में इस बयान से दूरी बनाए रखने के बाद भारत का अचानक समर्थन कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह संयुक्त बयान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘स्टेकआउट’ के दौरान जारी किया गया, जिसे फिलिस्तीन के राजदूत ने पढ़कर सुनाया। बयान में वेस्ट बैंक में इजरायल की उपस्थिति और विस्तारवादी कदमों की आलोचना की गई। इस पहल में Arab League, European Union, Russia, China सहित कुल 85 देशों का समर्थन शामिल था।
भारत की स्थिति पर विशेष ध्यान इसलिए गया क्योंकि हाल के वर्षों में उसने इजरायल के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग को मजबूत किया है। हालांकि, भारत लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है और फिलिस्तीन मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाता आया है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत का इस बयान में शामिल होना उसकी पारंपरिक नीति—संवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति प्रक्रिया—के अनुरूप है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने इस कदम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह किसी एक धड़े के साथ पूरी तरह नहीं खड़ा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलन बनाए रखना चाहता है। रूस और चीन जैसे देशों के साथ इस बयान में शामिल होना बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में भारत की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रस्तावित इजरायल दौरे की भी चर्चा है। ऐसे समय में जब भारत का नाम इजरायल की आलोचना करने वाले देशों की सूची में शामिल हुआ, पीएम का दौरा कूटनीतिक संतुलन का संकेत माना जा रहा है।
गाजा में युद्धविराम के बाद वेस्ट बैंक में बढ़ती गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता व्यक्त की जा रही है। संयुक्त बयान में कहा गया कि क्षेत्र में एकतरफा कदम शांति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के इस रुख को उसकी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति से भी जोड़ा जा रहा है, जिसके तहत वह वैश्विक मुद्दों पर स्वतंत्र निर्णय लेने पर जोर देता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत अपने इजरायल और फिलिस्तीन संबंधों के बीच संतुलन कैसे साधता है और पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति में अपनी भूमिका किस प्रकार आगे बढ़ाता है।
यह संयुक्त बयान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘स्टेकआउट’ के दौरान जारी किया गया, जिसे फिलिस्तीन के राजदूत ने पढ़कर सुनाया। बयान में वेस्ट बैंक में इजरायल की उपस्थिति और विस्तारवादी कदमों की आलोचना की गई। इस पहल में Arab League, European Union, Russia, China सहित कुल 85 देशों का समर्थन शामिल था।
भारत की स्थिति पर विशेष ध्यान इसलिए गया क्योंकि हाल के वर्षों में उसने इजरायल के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग को मजबूत किया है। हालांकि, भारत लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है और फिलिस्तीन मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाता आया है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत का इस बयान में शामिल होना उसकी पारंपरिक नीति—संवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति प्रक्रिया—के अनुरूप है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने इस कदम के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह किसी एक धड़े के साथ पूरी तरह नहीं खड़ा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलन बनाए रखना चाहता है। रूस और चीन जैसे देशों के साथ इस बयान में शामिल होना बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में भारत की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रस्तावित इजरायल दौरे की भी चर्चा है। ऐसे समय में जब भारत का नाम इजरायल की आलोचना करने वाले देशों की सूची में शामिल हुआ, पीएम का दौरा कूटनीतिक संतुलन का संकेत माना जा रहा है।
गाजा में युद्धविराम के बाद वेस्ट बैंक में बढ़ती गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता व्यक्त की जा रही है। संयुक्त बयान में कहा गया कि क्षेत्र में एकतरफा कदम शांति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के इस रुख को उसकी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की नीति से भी जोड़ा जा रहा है, जिसके तहत वह वैश्विक मुद्दों पर स्वतंत्र निर्णय लेने पर जोर देता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत अपने इजरायल और फिलिस्तीन संबंधों के बीच संतुलन कैसे साधता है और पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति में अपनी भूमिका किस प्रकार आगे बढ़ाता है।