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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
ममता बनर्जी पर हस्तक्षेप का आरोप लगाया
ED छापे में हस्तक्षेप आरोप मामला, ममता बनर्जी पर याचिका पर 18 फरवरी सुनवाई
17 Feb 2026, 11:00 AM
Delhi -
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
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New Delhi सुप्रीम कोर्ट में I-PAC दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस याचिका में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर छापे में दखल देने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि ED द्वारा I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कार्यालय पर की गई कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ। इस पर कोर्ट को बताया गया कि इसी घटनाक्रम से जुड़ी एक अन्य याचिका पहले से लंबित है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि चूंकि मामला पहले से विचाराधीन याचिका से संबंधित है, इसलिए इसे उसी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। अदालत ने 18 फरवरी को विस्तृत सुनवाई के लिए तारीख तय की है।
इससे पहले ED और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच I-PAC दफ्तर पर छापे को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। टीएमसी ने छापेमारी को राजनीतिक कार्रवाई बताया था, जबकि ED ने इसे कानून के दायरे में की गई जांच बताया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत इस मामले में यह स्पष्ट करेगी कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई में किसी तरह का बाहरी हस्तक्षेप हुआ या नहीं। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो इसका राजनीतिक और कानूनी असर व्यापक हो सकता है।
I-PAC, जिसे चुनावी रणनीति और राजनीतिक परामर्श के लिए जाना जाता है, विभिन्न दलों के साथ काम करता रहा है। ऐसे में छापेमारी और उसके बाद की घटनाओं ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी पक्ष 18 फरवरी की सुनवाई की तैयारी में जुट गए हैं। अदालत के आगामी आदेश पर इस पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि ED द्वारा I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कार्यालय पर की गई कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ। इस पर कोर्ट को बताया गया कि इसी घटनाक्रम से जुड़ी एक अन्य याचिका पहले से लंबित है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि चूंकि मामला पहले से विचाराधीन याचिका से संबंधित है, इसलिए इसे उसी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। अदालत ने 18 फरवरी को विस्तृत सुनवाई के लिए तारीख तय की है।
इससे पहले ED और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच I-PAC दफ्तर पर छापे को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिली थी। टीएमसी ने छापेमारी को राजनीतिक कार्रवाई बताया था, जबकि ED ने इसे कानून के दायरे में की गई जांच बताया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत इस मामले में यह स्पष्ट करेगी कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई में किसी तरह का बाहरी हस्तक्षेप हुआ या नहीं। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो इसका राजनीतिक और कानूनी असर व्यापक हो सकता है।
I-PAC, जिसे चुनावी रणनीति और राजनीतिक परामर्श के लिए जाना जाता है, विभिन्न दलों के साथ काम करता रहा है। ऐसे में छापेमारी और उसके बाद की घटनाओं ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी पक्ष 18 फरवरी की सुनवाई की तैयारी में जुट गए हैं। अदालत के आगामी आदेश पर इस पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।