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आंगनबाड़ी को सम्मान
फैसले से सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास का संदेश
IAS पुलकित गर्ग ने दिखाई सादगी, बेटी का दाखिला आंगनबाड़ी में कर बन गए मिसाल
07 Feb 2026, 11:42 AM
Uttar Pradesh -
Chitrakoot
Reporter :
Mahesh Sharma
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Chitrakoot चित्रकूट जिले के जिलाधिकारी IAS पुलकित गर्ग इन दिनों अपने एक अनोखे और सराहनीय फैसले को लेकर चर्चा में हैं। आमतौर पर सक्षम और उच्च पदों पर बैठे लोग अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना पसंद करते हैं, लेकिन पुलकित गर्ग ने इस सोच से हटकर अपनी बेटी का दाखिला सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराकर एक नई मिसाल पेश की है।
पुलकित गर्ग की यह पहली तैनाती बतौर जिलाधिकारी चित्रकूट में हुई है। पद संभालने के कुछ समय बाद जब उनकी बेटी सिया के प्रारंभिक शिक्षा में दाखिले की बारी आई, तो उन्होंने निजी प्ले स्कूल के बजाय नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र को चुना। जिस आंगनबाड़ी में सिया का दाखिला कराया गया है, वहां पहले से लगभग 35 बच्चे पंजीकृत हैं, और सिया भी अन्य बच्चों की तरह उनके साथ बैठकर पढ़ाई और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेती है।
जिलाधिकारी का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा केवल बड़ी इमारतों, महंगे खिलौनों या ऊंची फीस से मजबूत नहीं होती, बल्कि बच्चों को सुरक्षित माहौल, सही देखभाल, पोषण और एक्टिविटी आधारित शिक्षा से बेहतर सीख मिलती है। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव रख सकते हैं।
IAS पुलकित गर्ग ने यह भी बताया कि जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित ट्रेनिंग कराई जा रही है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा और पोषण मिल सके। उनके इस कदम से न सिर्फ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी सरकारी व्यवस्थाओं पर मजबूत हुआ है।
स्थानीय नागरिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी के इस फैसले की खुलकर प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि जब जिले का शीर्ष अधिकारी स्वयं अपने बच्चे को आंगनबाड़ी में पढ़ाता है, तो इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और सरकारी संस्थानों की छवि मजबूत होती है।
कुल मिलाकर, IAS पुलकित गर्ग का यह निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक सोच बदलने वाला कदम माना जा रहा है। यह उदाहरण साबित करता है कि अगर प्रशासनिक अधिकारी खुद पहल करें, तो व्यवस्था में विश्वास और सुधार दोनों संभव हैं।
पुलकित गर्ग की यह पहली तैनाती बतौर जिलाधिकारी चित्रकूट में हुई है। पद संभालने के कुछ समय बाद जब उनकी बेटी सिया के प्रारंभिक शिक्षा में दाखिले की बारी आई, तो उन्होंने निजी प्ले स्कूल के बजाय नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र को चुना। जिस आंगनबाड़ी में सिया का दाखिला कराया गया है, वहां पहले से लगभग 35 बच्चे पंजीकृत हैं, और सिया भी अन्य बच्चों की तरह उनके साथ बैठकर पढ़ाई और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेती है।
जिलाधिकारी का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा केवल बड़ी इमारतों, महंगे खिलौनों या ऊंची फीस से मजबूत नहीं होती, बल्कि बच्चों को सुरक्षित माहौल, सही देखभाल, पोषण और एक्टिविटी आधारित शिक्षा से बेहतर सीख मिलती है। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव रख सकते हैं।
IAS पुलकित गर्ग ने यह भी बताया कि जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित ट्रेनिंग कराई जा रही है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा और पोषण मिल सके। उनके इस कदम से न सिर्फ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी सरकारी व्यवस्थाओं पर मजबूत हुआ है।
स्थानीय नागरिकों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी के इस फैसले की खुलकर प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि जब जिले का शीर्ष अधिकारी स्वयं अपने बच्चे को आंगनबाड़ी में पढ़ाता है, तो इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और सरकारी संस्थानों की छवि मजबूत होती है।
कुल मिलाकर, IAS पुलकित गर्ग का यह निर्णय केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक सोच बदलने वाला कदम माना जा रहा है। यह उदाहरण साबित करता है कि अगर प्रशासनिक अधिकारी खुद पहल करें, तो व्यवस्था में विश्वास और सुधार दोनों संभव हैं।