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70% विश्व बाजार खुला
किसानों के हित सुरक्षित, निर्यात को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
पीयूष गोयल बोले, 38 देशों से फ्री ट्रेड डील, भारत के लिए खुला वैश्विक बाजार
14 Feb 2026, 03:33 PM
Maharashtra -
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
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Mumbai केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत ने 38 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) कर वैश्विक व्यापार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। उनके मुताबिक इन समझौतों के चलते दुनिया के करीब 70 प्रतिशत बाजार भारतीय उत्पादों के लिए खुल चुके हैं, जिससे निर्यात और निवेश को नई रफ्तार मिलेगी।
बजट और व्यापार नीति पर आयोजित एक कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि सरकार की रणनीति का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात हब बनाना है। उन्होंने बताया कि इन व्यापार समझौतों में किसानों, श्रमिकों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के हितों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ऐसे उत्पादों का आयात न बढ़े, जो देश में पहले से पर्याप्त मात्रा में निर्मित हो रहे हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की व्यापार नीति संतुलित और रणनीतिक है। “हम जब भी किसी देश के साथ समझौता करते हैं, तो यह देखते हैं कि वहां कौन-सी वस्तुएं बनती हैं और क्या वे भारत में भी बन रही हैं। यदि कोई वस्तु देश में पर्याप्त मात्रा में बन रही है, तो उसे अनियंत्रित रूप से आयात करने की अनुमति नहीं दी जाती,” उन्होंने स्पष्ट किया।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का फोकस केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने पर है। इन एफटीए के जरिए भारतीय कृषि उत्पादों, वस्त्र उद्योग, फार्मा और इंजीनियरिंग वस्तुओं को नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
बजट के संदर्भ में उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया गया है। रेलवे और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भारी निवेश से निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में मौजूदा बजट आवंटन को कहीं अधिक प्रभावी बताया।
कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच के कारण भारत वैश्विक मंच पर तेजी से उभर रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डेटा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से विशेष रूप से नवी मुंबई जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिल रहा है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल आयातक देश नहीं, बल्कि निर्यात-प्रधान अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। सरकार की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में भारत की हिस्सेदारी वैश्विक व्यापार में और अधिक बढ़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समझौतों का सही क्रियान्वयन हुआ, तो भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है। हालांकि, घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना भी उतना ही जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, सरकार का दावा है कि फ्री ट्रेड डील्स और बजट प्रावधानों के जरिए भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
बजट और व्यापार नीति पर आयोजित एक कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि सरकार की रणनीति का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात हब बनाना है। उन्होंने बताया कि इन व्यापार समझौतों में किसानों, श्रमिकों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के हितों को प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि ऐसे उत्पादों का आयात न बढ़े, जो देश में पहले से पर्याप्त मात्रा में निर्मित हो रहे हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की व्यापार नीति संतुलित और रणनीतिक है। “हम जब भी किसी देश के साथ समझौता करते हैं, तो यह देखते हैं कि वहां कौन-सी वस्तुएं बनती हैं और क्या वे भारत में भी बन रही हैं। यदि कोई वस्तु देश में पर्याप्त मात्रा में बन रही है, तो उसे अनियंत्रित रूप से आयात करने की अनुमति नहीं दी जाती,” उन्होंने स्पष्ट किया।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का फोकस केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने पर है। इन एफटीए के जरिए भारतीय कृषि उत्पादों, वस्त्र उद्योग, फार्मा और इंजीनियरिंग वस्तुओं को नए बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
बजट के संदर्भ में उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया गया है। रेलवे और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भारी निवेश से निर्यात को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में मौजूदा बजट आवंटन को कहीं अधिक प्रभावी बताया।
कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच के कारण भारत वैश्विक मंच पर तेजी से उभर रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डेटा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से विशेष रूप से नवी मुंबई जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिल रहा है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अब केवल आयातक देश नहीं, बल्कि निर्यात-प्रधान अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। सरकार की कोशिश है कि आने वाले वर्षों में भारत की हिस्सेदारी वैश्विक व्यापार में और अधिक बढ़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समझौतों का सही क्रियान्वयन हुआ, तो भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा लाभ मिल सकता है। हालांकि, घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना भी उतना ही जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, सरकार का दावा है कि फ्री ट्रेड डील्स और बजट प्रावधानों के जरिए भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।