Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- स्वास्थ्य
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
Current:
India
Country: India
Selected State: None
OLA CEO पर अरेस्ट वारंट जारी
गोवा कंज्यूमर आयोग ने Ola CEO के खिलाफ आदेश जारी किया
रिपेयरिंग के लिए दी बाइक गायब, गोवा आयोग ने Bhavish Aggarwal पर अरेस्ट वारंट जारी
17 Feb 2026, 02:19 PM
Goa -
Panaji
Reporter :
Mahesh Sharma
ADVERTISEMENT
Sponsored
Ad
Open
Panaji गोवा में देश की प्रमुख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता कंपनी Ola Electric की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी नामक ग्राहक ने आरोप लगाया कि उनकी खरीदी गई Ola इलेक्ट्रिक बाइक मरम्मत के लिए कंपनी को दी गई थी, लेकिन इसके बाद बाइक गायब हो गई। इस मामले में गोवा कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने 4 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर कंपनी और इसके सीईओ भविश अग्रवाल (Bhavish Aggarwal) के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया।
अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने बाइक की पूरी कीमत चुका दी थी और मरम्मत के लिए इसे ओला को सौंपा था, लेकिन कंपनी की लापरवाही के कारण वाहन वापस नहीं मिला। आयोग ने इसे गंभीर उपभोक्ता धोखाधड़ी का मामला माना और कंपनी पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
कंपनी की तरफ से यह मामला पहले से ही विवादास्पद था क्योंकि कई ग्राहकों ने पिछले कुछ महीनों में इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस मामले में कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भविश अग्रवाल के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट ने Ola Electric के व्यवसाय और सार्वजनिक छवि पर गहरा असर डाला है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वह आयोग के आदेश का सम्मान करती है और मामले की जांच में सहयोग कर रही है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आयोग का आदेश लागू होता है तो यह भारत में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
इस घटना ने उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने हाल ही में Ola बाइक खरीदी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों को अब उपभोक्ता शिकायतों और वाहन की ट्रैकिंग सिस्टम पर और अधिक पारदर्शिता लाने की जरूरत है।
Ola Electric पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है और भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अग्रणी बन चुकी है। हालांकि, इस तरह के मामले कंपनी की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाते हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि कंपनी उपभोक्ता को उसके वाहन की स्थिति और मरम्मत की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी दे।
इस मामले की सुनवाई आगे होने वाली है और यदि Bhavish Aggarwal और कंपनी आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो कानूनी कार्रवाई और सख्त हो सकती है। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में जवाबदेही को लेकर देशभर में ध्यान आकर्षित कर रहा है।
कुल मिलाकर, गोवा के इस आदेश ने न केवल Ola Electric बल्कि पूरे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर उद्योग को सतर्क किया है। उपभोक्ताओं के लिए यह याद दिलाने वाला संदेश है कि उनका अधिकार सुरक्षित है और किसी भी कंपनी द्वारा लापरवाही बरतने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने बाइक की पूरी कीमत चुका दी थी और मरम्मत के लिए इसे ओला को सौंपा था, लेकिन कंपनी की लापरवाही के कारण वाहन वापस नहीं मिला। आयोग ने इसे गंभीर उपभोक्ता धोखाधड़ी का मामला माना और कंपनी पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
कंपनी की तरफ से यह मामला पहले से ही विवादास्पद था क्योंकि कई ग्राहकों ने पिछले कुछ महीनों में इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस मामले में कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भविश अग्रवाल के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट ने Ola Electric के व्यवसाय और सार्वजनिक छवि पर गहरा असर डाला है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वह आयोग के आदेश का सम्मान करती है और मामले की जांच में सहयोग कर रही है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आयोग का आदेश लागू होता है तो यह भारत में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
इस घटना ने उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने हाल ही में Ola बाइक खरीदी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों को अब उपभोक्ता शिकायतों और वाहन की ट्रैकिंग सिस्टम पर और अधिक पारदर्शिता लाने की जरूरत है।
Ola Electric पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है और भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में अग्रणी बन चुकी है। हालांकि, इस तरह के मामले कंपनी की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाते हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि कंपनी उपभोक्ता को उसके वाहन की स्थिति और मरम्मत की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी दे।
इस मामले की सुनवाई आगे होने वाली है और यदि Bhavish Aggarwal और कंपनी आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो कानूनी कार्रवाई और सख्त हो सकती है। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में जवाबदेही को लेकर देशभर में ध्यान आकर्षित कर रहा है।
कुल मिलाकर, गोवा के इस आदेश ने न केवल Ola Electric बल्कि पूरे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर उद्योग को सतर्क किया है। उपभोक्ताओं के लिए यह याद दिलाने वाला संदेश है कि उनका अधिकार सुरक्षित है और किसी भी कंपनी द्वारा लापरवाही बरतने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।