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बुर्के में कांवड़ यात्रा
170 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा पूरी की
संभल की तमन्ना मलिक ने बुर्के में कांवड़ लाई, जलाभिषेक पर सियासी बयानबाजी तेज
16 Feb 2026, 12:07 PM
Uttar Pradesh -
Sambhal
Reporter :
Mahesh Sharma
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Sambhal उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक अनोखी कांवड़ यात्रा ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। बदनपुर बसई गांव की रहने वाली तमन्ना मलिक ने बुर्का पहनकर हरिद्वार से गंगाजल लाया और शिव मंदिर में जलाभिषेक किया। इस कदम को जहां कुछ लोगों ने सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बताया, वहीं कुछ राजनीतिक नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है।
बताया जा रहा है कि तमन्ना ने अपने पति अमन त्यागी के साथ लगभग 170 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पूरी की। दोनों ने करीब साढ़े तीन वर्ष पहले अंतरधार्मिक विवाह किया था। विवाह के समय तमन्ना ने मन्नत मांगी थी कि यदि उनका दांपत्य जीवन सफल रहता है तो वह हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगी। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने यह यात्रा की।
यात्रा के दौरान कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। हरिद्वार से गंगाजल लाकर उन्होंने मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की। हालांकि बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताया, जबकि अन्य ने धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में सवाल उठाए।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने नाराजगी जताई और इसे अनावश्यक प्रचार करार दिया। उनके बयान के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। दूसरी ओर, तमन्ना ने कहा कि वह पहले भी बुर्का पहनती थीं और यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। उनका मानना है कि आस्था का संबंध दिल से होता है, पहनावे से नहीं।
अमन त्यागी का कहना है कि यात्रा के दौरान उन्हें विभिन्न सामाजिक संगठनों का सहयोग मिला। उन्होंने इसे प्रेम, विश्वास और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। इस पूरे घटनाक्रम ने संभल सहित आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का माहौल बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन की बहस को सामने लाती है। जहां एक ओर भारत में विविधता और सहअस्तित्व की परंपरा रही है, वहीं ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो जाती है।
फिलहाल यह मुद्दा सामाजिक संवाद का विषय बना हुआ है। समर्थक इसे सौहार्द्र की मिसाल बता रहे हैं, जबकि आलोचक अपनी-अपनी दृष्टि से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि तमन्ना ने अपने पति अमन त्यागी के साथ लगभग 170 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पूरी की। दोनों ने करीब साढ़े तीन वर्ष पहले अंतरधार्मिक विवाह किया था। विवाह के समय तमन्ना ने मन्नत मांगी थी कि यदि उनका दांपत्य जीवन सफल रहता है तो वह हरिद्वार से कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगी। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने यह यात्रा की।
यात्रा के दौरान कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। हरिद्वार से गंगाजल लाकर उन्होंने मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की। हालांकि बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कुछ लोगों ने इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताया, जबकि अन्य ने धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में सवाल उठाए।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने नाराजगी जताई और इसे अनावश्यक प्रचार करार दिया। उनके बयान के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। दूसरी ओर, तमन्ना ने कहा कि वह पहले भी बुर्का पहनती थीं और यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। उनका मानना है कि आस्था का संबंध दिल से होता है, पहनावे से नहीं।
अमन त्यागी का कहना है कि यात्रा के दौरान उन्हें विभिन्न सामाजिक संगठनों का सहयोग मिला। उन्होंने इसे प्रेम, विश्वास और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। इस पूरे घटनाक्रम ने संभल सहित आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का माहौल बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन की बहस को सामने लाती है। जहां एक ओर भारत में विविधता और सहअस्तित्व की परंपरा रही है, वहीं ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो जाती है।
फिलहाल यह मुद्दा सामाजिक संवाद का विषय बना हुआ है। समर्थक इसे सौहार्द्र की मिसाल बता रहे हैं, जबकि आलोचक अपनी-अपनी दृष्टि से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।