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टीम अगले हफ्ते अमेरिका रवाना
कपड़ा व्यापार और अन्य डील पर फाइनल टच देने जाएंगे
भारत की टीम अगले हफ्ते अमेरिका जाएगी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए
17 Feb 2026, 01:54 PM
Delhi -
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
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New Delhi भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार वार्ता में अब बड़ा मोड़ आने वाला है। भारत की टीम अगले हफ्ते अमेरिका के लिए रवाना होगी, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को अंतिम रूप दिया जा सके। यह डील भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ कई व्यापारिक सेक्टरों में अवसरों को बढ़ाने वाली है।
इस डील पर अंतिम रूप देने की प्रक्रिया इस महीने की शुरुआत में ही शुरू हो गई थी, जब दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते का ऐलान किया था। भारतीय वाणिज्य सचिव राकेश अग्रवाल और उनके दल ने कहा कि संयुक्त बयान डील की रूपरेखा को स्पष्ट करता है, और अब इसे अंतिम रूप देना ही शेष है।
सूत्रों के अनुसार, भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल में वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और कपड़ा निर्यातक शामिल होंगे। यह डील मुख्य रूप से कपड़ा और कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात को आसान बनाने और शुल्क एवं नियमों में पारदर्शिता बढ़ाने पर केंद्रित है। भारत कपास का बड़ा आयातक है और उसे यूरोपीय संघ और अमेरिका के कपड़ों पर शुल्क और व्यापार बाधाओं की स्थिति को देखते हुए यह समझौता बेहद आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह डील दोनों देशों के उद्योगों के लिए लाभकारी साबित होगी। अमेरिका को भारतीय बाजार में अपने उत्पादों के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे, वहीं भारत अमेरिकी तकनीक और कृषि उपकरणों तक आसान पहुंच हासिल कर सकेगा। इसके अलावा, इस समझौते से भारतीय व्यापारियों को अमेरिकी बाजार में निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी और कपड़ा उद्योग समेत कई सेक्टरों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
भारत की टीम की अमेरिका यात्रा को लेकर व्यापारिक और सरकारी स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं। इस दौरान समझौते के सभी बिंदुओं पर चर्चा होगी, और अंतिम हस्ताक्षर के लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। यह समझौता सिर्फ व्यापारिक सहयोग को नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को भी मजबूत करने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊंचाइयों को देखा जा सकता है, खासकर आर्थिक और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में। दोनों देशों के उद्योगपतियों और निर्यातकों के लिए यह डील अवसरों का एक नया द्वार खोलेगी।
उम्मीद की जा रही है कि समझौते पर अंतिम रूप देने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां और निवेश तेजी से बढ़ेंगे, और भारतीय बाजार में अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ेगी।
इस डील पर अंतिम रूप देने की प्रक्रिया इस महीने की शुरुआत में ही शुरू हो गई थी, जब दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते का ऐलान किया था। भारतीय वाणिज्य सचिव राकेश अग्रवाल और उनके दल ने कहा कि संयुक्त बयान डील की रूपरेखा को स्पष्ट करता है, और अब इसे अंतिम रूप देना ही शेष है।
सूत्रों के अनुसार, भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल में वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और कपड़ा निर्यातक शामिल होंगे। यह डील मुख्य रूप से कपड़ा और कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात को आसान बनाने और शुल्क एवं नियमों में पारदर्शिता बढ़ाने पर केंद्रित है। भारत कपास का बड़ा आयातक है और उसे यूरोपीय संघ और अमेरिका के कपड़ों पर शुल्क और व्यापार बाधाओं की स्थिति को देखते हुए यह समझौता बेहद आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह डील दोनों देशों के उद्योगों के लिए लाभकारी साबित होगी। अमेरिका को भारतीय बाजार में अपने उत्पादों के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे, वहीं भारत अमेरिकी तकनीक और कृषि उपकरणों तक आसान पहुंच हासिल कर सकेगा। इसके अलावा, इस समझौते से भारतीय व्यापारियों को अमेरिकी बाजार में निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी और कपड़ा उद्योग समेत कई सेक्टरों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
भारत की टीम की अमेरिका यात्रा को लेकर व्यापारिक और सरकारी स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं। इस दौरान समझौते के सभी बिंदुओं पर चर्चा होगी, और अंतिम हस्ताक्षर के लिए दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। यह समझौता सिर्फ व्यापारिक सहयोग को नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को भी मजबूत करने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊंचाइयों को देखा जा सकता है, खासकर आर्थिक और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में। दोनों देशों के उद्योगपतियों और निर्यातकों के लिए यह डील अवसरों का एक नया द्वार खोलेगी।
उम्मीद की जा रही है कि समझौते पर अंतिम रूप देने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां और निवेश तेजी से बढ़ेंगे, और भारतीय बाजार में अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ेगी।