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भारतीय CEO का दबदबा
मैक्रों बोले, वैश्विक कंपनियों में भारतीय नेतृत्व प्रभावशाली
मुंबई मंच से मैक्रों का भारत गुणगान, वैश्विक कंपनियों में भारतीय नेतृत्व की सराहना
18 Feb 2026, 10:38 AM Maharashtra - Mumbai
Reporter : Mahesh Sharma
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Mumbai फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुंबई में आयोजित इंडिया-फ्रांस इनोवेशन फोरम के दौरान भारत की नवाचार क्षमता और वैश्विक नेतृत्व में बढ़ती भूमिका की खुलकर सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों के शीर्ष पदों पर भारतीय मूल के अधिकारी नेतृत्व कर रहे हैं, जो भारत की प्रतिभा और शिक्षा व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।

मैक्रों ने उदाहरण देते हुए कहा कि Alphabet, Adobe और Chanel जैसी वैश्विक कंपनियों में भारतीय मूल के सीईओ अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर फ्रांसीसी लग्ज़री ब्रांड शनेल के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि उसके शीर्ष पद पर आसीन अधिकारी का संबंध महाराष्ट्र से है। यह टिप्पणी सुनकर कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों के बीच मुस्कान और तालियां गूंज उठीं।

इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी उपस्थित थे। मैक्रों की टिप्पणी पर दोनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान देखी गई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई गहराई और ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा विजन वैश्विक शांति, विकास और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

मैक्रों ने भारत की युवा आबादी और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक बताया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप संस्कृति, डिजिटल क्रांति और तकनीकी कौशल के कारण भारत दुनिया के औद्योगिक और तकनीकी मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। फ्रांस भारत के साथ रक्षा, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देना चाहता है।

इंडिया-फ्रांस इनोवेशन फोरम में दोनों देशों के उद्योगपतियों, स्टार्टअप संस्थापकों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवाचार, अनुसंधान और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मंच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएं भी खोलते हैं।

मैक्रों की टिप्पणी ने भारतीय प्रतिभा की वैश्विक पहचान को एक बार फिर रेखांकित किया है। यह संदेश स्पष्ट है कि आने वाले समय में वैश्विक उद्योगों के निर्माण और नेतृत्व में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।