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32 साल बाद भी कायम है फिल्म का प्रभाव
1994 में रिलीज हुई अंजाम आज भी अपने अलग तरह के कंटेंट और बोल्ड कहानी के लिए याद की जाती है। इस फिल्म ने उस दौर के पारंपरिक बॉलीवुड ट्रेंड से हटकर एक नया रास्ता दिखाया था। खासतौर पर माधुरी दीक्षित का किरदार, जो एक बदले की आग में जलती महिला का था, दर्शकों के लिए बिल्कुल नया अनुभव था। 32 साल बाद भी यह फिल्म चर्चा में है और इसके कई पहलुओं पर अब भी बातचीत होती रहती है।
माधुरी के किरदार ने बदली हीरोइन की छवि
उस समय बॉलीवुड में हीरोइन को आमतौर पर एक सॉफ्ट और सपोर्टिंग रोल में देखा जाता था, लेकिन इस फिल्म में माधुरी दीक्षित ने इस छवि को पूरी तरह बदल दिया। उनका किरदार न केवल मजबूत था, बल्कि उसमें आक्रामकता और बदले की भावना भी साफ नजर आती थी। यह बदलाव उस दौर के दर्शकों के लिए चौंकाने वाला था और इसी वजह से यह रोल आज भी यादगार माना जाता है।
अमिताभ बच्चन से मिली डायलॉग की प्रेरणा
फिल्म के एक मशहूर डायलॉग को लेकर हाल ही में एक दिलचस्प खुलासा हुआ है। बताया गया कि इस डायलॉग की प्रेरणा अमिताभ बच्चन के स्टाइल और उनकी फिल्मों से ली गई थी। उस समय अमिताभ बच्चन के एंग्री यंग मैन वाले किरदार बेहद लोकप्रिय थे और उनके डायलॉग डिलीवरी का असर पूरी इंडस्ट्री पर था। इसी प्रभाव को ध्यान में रखते हुए फिल्म के राइटर ने माधुरी के किरदार के लिए भी उसी तरह की दमदार डायलॉगबाजी तैयार की।
हिंसा के सीन ने दर्शकों को किया शॉक
फिल्म में दिखाए गए हिंसक सीन उस समय के हिसाब से काफी अलग और चौंकाने वाले थे। शाहरुख खान का निगेटिव किरदार और माधुरी का रिवेंज मोड, दोनों ही दर्शकों के लिए नया अनुभव था। कई सीन ऐसे थे, जिन्होंने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया और फिल्म को एक अलग पहचान दिलाई। यही वजह है कि यह फिल्म आज भी अपने कंटेंट के लिए जानी जाती है।
शाहरुख के निगेटिव रोल की भी हुई चर्चा
फिल्म में शाहरुख खान का किरदार भी काफी चर्चा में रहा। उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का रोल निभाया, जो जुनून और दीवानगी में किसी भी हद तक जा सकता है। यह उनके करियर के शुरुआती दिनों का एक अहम हिस्सा था, जहां उन्होंने पारंपरिक हीरो की छवि से हटकर अलग तरह के रोल करने का जोखिम उठाया।
आज भी प्रासंगिक है फिल्म की कहानी
अंजाम की कहानी और उसके किरदार आज भी कहीं न कहीं प्रासंगिक लगते हैं। समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका और उनके सशक्त रूप को दिखाने के मामले में यह फिल्म अपने समय से आगे थी। यही वजह है कि 32 साल बाद भी यह फिल्म केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सिनेमाई प्रयोग के रूप में देखी जाती है।
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