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नई टैक्स नीति से जनता में असंतोष बढ़ा
नेपाल में हाल ही में लागू की गई कस्टम ड्यूटी नीति ने आम जनता के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है। बालेन शाह के नेतृत्व में सरकार ने 100 रुपये से अधिक कीमत वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला लिया, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महंगाई पहले से ही लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस नीति के लागू होते ही लोगों को रोजमर्रा की जरूरत की चीजें खरीदने में भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे नाराजगी तेजी से बढ़ी है।
सड़कों पर उतरे लोग, बढ़ा विरोध प्रदर्शन
नई कस्टम ड्यूटी के खिलाफ देश के कई हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। खासतौर पर राजधानी काठमांडू में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने बिना जनता की जरूरतों को समझे यह फैसला लिया है, जिससे आम जीवन प्रभावित हो रहा है। कई जगहों पर बाजार बंद रहे और लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े हैं।
रोजमर्रा की चीजें भी हुईं महंगी
इस नई नीति का सबसे बड़ा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। 100 रुपये से ऊपर की कीमत वाले सामान पर टैक्स लगाने का मतलब यह है कि अब जरूरी वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं। खाने-पीने की चीजों से लेकर घरेलू सामान तक, हर चीज पर अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि इतनी कम सीमा तय करने से गरीब और मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ा है, जो पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।
ट्रंप की नीतियों से हो रही तुलना
नेपाल की इस नई नीति की तुलना अब डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों से की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह ट्रंप ने अमेरिका में आयात पर कड़े टैरिफ लगाए थे, उसी तरह नेपाल में भी अब संरक्षणवादी नीति अपनाई जा रही है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि नेपाल की आर्थिक स्थिति अमेरिका जैसी मजबूत नहीं है, ऐसे में इस तरह की नीति अपनाना जोखिम भरा हो सकता है।
सरकार का तर्क और विरोधियों के सवाल
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना और विदेशी सामान पर निर्भरता कम करना है। लेकिन विपक्ष और आम जनता इस तर्क से सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक और बिना तैयारी के लागू की गई इस नीति से व्यापार और आम जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कई व्यापारियों ने भी इस फैसले पर चिंता जताई है और इसे वापस लेने की मांग की है।
आगे क्या होगा, इस पर टिकी नजरें
नेपाल में बढ़ते विरोध के बीच अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस स्थिति को कैसे संभालती है। अगर विरोध इसी तरह बढ़ता रहा, तो सरकार पर नीति में बदलाव का दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल यह साफ है कि यह फैसला नेपाल की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर बड़ा असर डालने वाला है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार अपने फैसले पर कायम रहती है या जनता के दबाव में कोई बदलाव करती है।
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