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बड़े साइबर नेटवर्क का देशभर में खुलासा हुआ
देश में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच एक बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने एक संगठित ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह लंबे समय से ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए लोगों को निशाना बना रहा था और करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे चुका था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर लोगों को फंसाया जाता था। कार्रवाई के दौरान सामने आया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से काम करते थे और हर स्तर पर अपनी पहचान छिपाने के लिए नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करते थे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा कितनी अहम हो गई है।
गोवा से संचालित हो रहा था पूरा गिरोह नेटवर्क
जांच में यह खुलासा हुआ कि इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का संचालन मुख्य रूप से गोवा से किया जा रहा था। यहां से आरोपी देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को कॉल, मैसेज और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए फंसाते थे। गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे, जिनमें कुछ लोग फर्जी कॉल सेंटर चलाते थे तो कुछ बैंकिंग डिटेल्स और ओटीपी हासिल करने का काम करते थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए हैं। यह भी सामने आया कि आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदलते रहते थे ताकि जांच एजेंसियों से बच सकें।
16 आरोपियों की गिरफ्तारी, मास्टरमाइंड भी शामिल
इस बड़े ऑपरेशन में कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें इस गिरोह का मुख्य सरगना भी शामिल है। अधिकारियों के मुताबिक मास्टरमाइंड पूरे नेटवर्क को संचालित करता था और पैसों के लेनदेन से लेकर नए लोगों की भर्ती तक सभी फैसले वही लेता था। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपी भी अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए हैं, जिससे इस नेटवर्क के व्यापक फैलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस अब इन आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के बाकी सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता लगाया जा सके।
375 मामलों से जुड़ा देशव्यापी ठगी का जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह देशभर में करीब 375 साइबर ठगी के मामलों से जुड़ा हुआ है। इन मामलों में लोगों को निवेश, लोन, जॉब और ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगा गया था। कई पीड़ितों ने अपनी जीवन भर की बचत इस गिरोह के झांसे में आकर गंवा दी। पुलिस का कहना है कि अभी और भी मामलों के सामने आने की संभावना है, क्योंकि कई लोग शर्म या डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते। इस खुलासे के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक से सतर्क रहें और तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
क्रिप्टो और विदेशी मुद्रा के जरिए रकम ट्रांसफर
इस गिरोह की सबसे खास बात यह थी कि ठगी की रकम को सीधे बैंक खातों में रखने के बजाय उसे क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी मुद्रा में बदल दिया जाता था। इसके बाद इस पैसे को अवैध तरीके से विदेश भेज दिया जाता था, जिससे ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संपर्क में थे और विदेशी एजेंट्स के जरिए पैसे का लेनदेन करते थे। इस तकनीक के कारण पुलिस को इस गिरोह तक पहुंचने में काफी समय लगा।
साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता और सतर्कता जरूरी
इस बड़े खुलासे के बाद देशभर में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता और भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अपराधी भी नए तरीके अपनाते जा रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहना बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, ओटीपी साझा करने या संदिग्ध कॉल पर भरोसा करने से बचना चाहिए। सरकार और पुलिस भी लगातार जागरूकता अभियान चला रही है, लेकिन असली सुरक्षा तभी संभव है जब लोग खुद भी सावधानी बरतें और समय रहते सतर्क हो जाएं।
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